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मंगलवार, 07 जून, 2005 को 02:02 GMT तक के समाचार

सुतपा मुखर्जी

उषा और शिल्पी के प्रेम की लड़ाई

इलाहाबाद में रहनेवाली उषा यादव एक साल पहले मिलीं शिल्पी गुप्ता से और दोनों एक दूसरे से प्रेम करने लगीं.

एक दिन भी ऐसा नहीं बीता तबसे जब दोनों आपस में मिली ना हों या बात ना की हो.

लेकिन अब उन्हें एक-दूसरे से मिलने से रोक दिया गया है.

शिल्पी के माता-पिता ने एक तरह से उन्हें घर में बंद कर दिया है और उन्हें फ़ोन भी नहीं करने दिया जाता.

प्रेम

20 वर्षीया उषा, जो हाल-हाल तक कंप्यूटर के पेशे से जुड़ी थीं, 22 वर्षीया शिल्पी से अपने प्रेम के बारे में बात करते नहीं झिझकतीं और कहती हैं कि उन्हें पहली ही नज़र में प्यार हो गया.

उषा कहती हैं,"शिल्पी मुझे समझती थी और चाहती थी कि मैं ख़त लिखूँ. वो भी मुझे लिखती थी और प्यार जताने के लिए ख़त पर लिपस्टिक से निशान भी बनाती थी".

उषा नहीं मानतीं कि उन्होंने कोई अपराध किया है और ना ही उन्हें अपने समलैंगिक संबंध पर कोई शर्म है.

वे कहती हैं,"मुझे लगता है कि मैं अलग तरह से बनी हूँ, मैंने कभी किसी पुरूष के लिए लगाव महसूस नहीं किया. पहले भी स्कूल में मैं एक लड़की को चाहती थी लेकिन उसके पिता का स्थानांतरण हो गया".

शादी

इस वर्ष जनवरी में शिल्पी की शादी तय कर दी गई और उषा इससे ख़ासी नाराज़ हो गईं.

उषा ने कहा,"मैं सोच ही नहीं सकती थी कि शिल्पी किसी और के साथ रहे और शिल्पी का भी यही हाल था".

शिल्पी के पिता ने बताया कि उषा से प्रेम के कारण शिल्पी सदा शादी के प्रस्तावों को ठुकराती रही.

आख़िर जब जनवरी में शादी तय हुई तो दोनों गुजरात भाग गए.

फिर शिल्पी के माता-पिता ने पुलिस में ये शिकायत कर दी कि उषा ने उनकी बेटी का अपहरण कर लिया है.

पुलिस दोनों को अदालत ले गई जिसने उनसे अपने-अपने घर जाने को कहा.

स्थिति

अभी स्थिति ये है कि उषा के आने-जाने पर तो कोई रोक नहीं है लेकिन शिल्पी अपने घर पर ही रहती है.

उषा बताती हैं,"जब भी मैं शिल्पी के घर फ़ोन करती हूँ मुझे कहा जाता है कि वह नहीं है. मैं किसी चीज़ पर ध्यान नहीं दे पा रही और मुझे लगता है कि शिल्पी की भी यही हालत होगी".

उधर शिल्पी की माँ मधु गुप्ता कुछ और कहती हैं.

वे कहती हैं,"उषा ने मेरी बेटी को बहकाया. ये भगवान का प्रताप है कि हमें हमारी बेटी वापस मिल गई".

ताने और हिम्मत

उधर उषा के घरवाले इस बारे में कुछ नहीं कहते लेकिन उषा असहज महसूस करती हैं.

वे कहती हैं,"अक्सर बाहर लोग ताने मारकर पूछते हैं कि मेरी पति शिल्पी कहाँ है".

एक ओर जब उषा और शिल्पी अपने संबंध को जीवित रखने के लिए संघर्ष कर रहे थे वहीं इसी बीच कानपुर में ऐसी ही दो महिला प्रेमियों की आत्महत्या की कोशिश करने की ख़बर आई.

दोनों का कहना था कि उनकी ज़िंदगी का कोई मतलब नहीं रहा क्योंकि उनकी शादी पुरूषों से करवा दी गई.

लेकिन उषा उन दोनों महिला प्रेमियों के इस प्रयास का कायरता बताती हैं.

वे कहती हैं,"शिल्पी और मैं मज़बूत हैं. अगर शिल्पी की शादी कर भी दी गई तो भी हम इस संबंध को तब तक बनाए रखेंगे जब तक कि समाज इसे स्वीकार नहीं कर लेता".

ऐसी घटनाओं के बीच अब कई संगठनों ने समलैंगिक संबंधों के बारे में गंभीरता से विचार करने की बात उठाई है.

कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि सरकार को अब सर्वोच्च न्यायालय के उस सुझाव पर विचार करना चाहिए जिसमें समलैंगिक विवाह के बारे में समीक्षा करने के लिए कहा गया था.