शनिवार, 04 जून, 2005 को 13:38 GMT तक के समाचार
मणिकांत ठाकुर
बीबीसी संवाददाता, पटना
बिहार बाढ़ राहत घोटाले को लेकर हर दिन कोई न कोई नया तथ्य सामने आ रहा है.
नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में बाढ़ राहत में कथित घोटाले पर गौतम गोस्वामी की भूमिका पर उँगली उठाई गई है.
इसमें कहा गया है कि बाढ़ राहत के लिए इस मामले में एक अभियुक्त और पटना के पूर्व ज़िलाधिकारी गौतम गोस्वामी को प्रभारी अधिकारी बनाने का कोई आदेश सरकारी संचिका में दर्ज नहीं है.
साथ ही अग्रिम भुगतान पर भी आपत्ति जताई गई है. इस मामले में राज्य सरकार ने जो एफ़आईआर दर्ज की है, उसमें भी इस रिपोर्ट का उल्लेख है.
भाजपा नेता सुशील मोदी ने इस संबंध में एक पत्रकार वार्ता की और आरोप लगाया कि इस मामले के तार लालू यादव के परिवार के एक सदस्य से जुड़े हैं.
सुनवाई टली
दूसरी ओर गौतम गोस्वामी की अग्रिम ज़मानत की सुनवाई अदालत ने 6 जुलाई तक के लिए टाल दी है.
गौतम गोस्वामी की ओर से पटना की एक अदालत में अग्रिम ज़मानत की याचिका दायर की गई थी.
गोस्वामी और 20 अन्य लोगों पर बाढ़ राहत की धनराशि में घपला करने का आरोप है. उस दौरान गौतम गोस्वामी पटना के ज़िलाधिकारी थे.
मंगलवार को उनके ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती गिरफ़्तारी वारंट जारी कर दिया गया था.
गौतम गोस्वामी के वकील तुहिन शंकर की दलील है कि यदि उन्हें अग्रिम ज़मानत मिल गई तो वो बिना डर के अपना पक्ष रख सकेंगे.
उनका कहना था कि यदि गौतम गोस्वामी को निचली अदालत से ज़मानत नहीं मिली तो वो हाईकोर्ट में आवेदन करेंगे.
इसके पहले इस मामले के एक और अभियुक्त संतोष झा ने बुधवार को पटना के एक विशेष जज के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था.
बाद में स्वास्थ्य के आधार पर दाखिल ज़मानत याचिका को रद्द करते हुए उन्हें छह जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.
संतोष झा बाबा सत्य साईं इंटरप्राइज़ेस (बीएसएसआई) के संचालक हैं और जिन्हें सरकार की ओर से बाढ़ राहत के 18 करोड़ के चेक दिए गए थे.
दरअसल ये चेक बीएसएसआई (बिहार स्माल स्केल इंडस्ट्रीज़) के नाम से जारी होना था लेकिन सरकारी अफ़सरों की साठगाँठ से यह राशि दूसरे बीएसएसआई को दे दी गई.
इस 18 करोड़ रुपए में से 11 करोड़ रुपए का कोई हिसाब किताब नहीं मिल रहा है.