शुक्रवार, 03 जून, 2005 को 11:38 GMT तक के समाचार
सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता, कोलकाता
पश्चिम बंगाल में रसोई की शान मानी जाने वाली हिलसा मछलियों के मध्यवर्ग की पहुँच से दूर होने की आशंका बन गई है.
सबसे अच्छी किस्म की चमकीली सफ़ेद हिलसा मछलियाँ बांग्लादेश की नदियों से आती हैं.
पिछले महीने के दूसरे हफ़्ते के बाद भारत में बांग्लादेशी हिलसा मछलियों की आपूर्ति बहुत ही कम रह गई है क्योंकि अधिकारियों ने स्वास्थ्य और साफ-सफाई के नाम पर इनके आयात पर रोक लगा दी है.
इस कारण कोलकाता के बाज़ारों में हिलसा मछली की कीमत आसमान छूने की आशंका है. इस समय स्थानीय बाज़ारों में हिलसा मछली 100 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची जाती है.
अधिकारियों ने हिलसा के आयात पर रोक लगाने में पाँच साल पहले बने एक क़ानून को आधार बनाया है जिसमें माँस-मछली और दूध जैसी उत्पादों के आयात के लिए वैध परमिट की ज़रूरत बताई गई है.
इस क़ानून में ये भी प्रावधान है कि मछलियों का आयात वायु या जलमार्ग से किया जा सकता है, जबकि बांग्लादेश से हिलसा मछली की ज़्यादातर खेप सड़क मार्ग से आती है.
विरोध
पिछले साल अकेले पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से 5,000 टन हिलसा मछली का आयात किया गया.
राज्य के मछली विक्रेताओं ने केंद्र सरकार के नए निर्देश का विरोध किया है.
हिलसा आयातक संघ के सचिव सैयद अनवर मक़सूद कहते हैं, "हिलसा जैसी मछलियों को लाइवस्टॉक की श्रेणी में रखा जाना ठीक नहीं है. हम हिलसा का सड़क मार्ग से आयात करते हैं, ऐसे में हम हर खेप के लिए परमिट कहाँ से लाएँगे."
उन्होंने कहा, "दिल्ली में अधिकारियों को पता नहीं है कि हिलसा हम बंगालियों के लिए कितना महत्वपूर्ण है."
पश्चिमी बंगाल में बर्मा से भी हिलसा का आयात होता है, लेकिन किसी भी बंगाली से पूछें वो कहेगा बांग्लादेशी हिलसा की बात ही कुछ और है.
आयातकों ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है. राज्य के मत्स्य विभाग के मंत्री किरणमय नंदा ने कहा है कि सरकार मामले पर विचार कर रही है.