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बुधवार, 01 जून, 2005 को 12:08 GMT तक के समाचार

शर्मिला टैगोर
सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष

'फ़िल्मों में धूम्रपान के दृश्य बहुत होते हैं'

सूचना प्रसारण मंत्रालय के जो दिशा-निर्देश हैं, उन्हें तो हमें मानना ही पड़ेगा.

इसमें कोई शक नहीं कि सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इसका इसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.

मेरा मानना है कि फ़िल्मों में सिगरेट के दृश्य कुछ अधिक ही दिखाए जाते हैं.

फ़िल्म में जो लोग बुरे हैं वो अधिकतर सिगरेट पीते हैं और बार में भी जाते हैं.

लेकिन पश्चिमी देशों में ऐसा नहीं है. ब्रिटिश और अमरीकी टेलीविज़न में ऐसा नहीं है लेकिन हमारे यहाँ यह ज़रूरी बन गया है.

सिगरेट के विज्ञापनों पर प्रतिबंध है लेकिन यह काम फ़िल्म के ज़रिए हो रहा है.

इसका अच्छा असर नहीं पड़ेगा.

बच्चों में शाहरुख ख़ान, आमिर ख़ान जैसे सितारे बहुत लोकप्रिय हैं.

अगर इन सितारों को सिगरेट पीते दिखाया जाता है तो इसका असर बड़ा पड़ता है.

ये लोग जो करते हैं, बच्चे भी उसकी नकल करते हैं.

इसलिए मुझे लगता है कि फ़िल्मों में सिगरेट पीने के दृश्यों पर पाबंदी सही है.

(विनीता द्विवेदी से बातचीत पर आधारित)