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मंगलवार, 31 मई, 2005 को 05:55 GMT तक के समाचार

'स्वायत्तता' पर पाकिस्तान का खंडन

पाकिस्तान ने इस बात का खंडन किया है कि परवेज़ मुशर्रफ़ ने कश्मीर समस्या के हल के लिए कभी 'स्वायत्तता' या 'अर्ध स्वायत्तता' की पैरवी की थी.

पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता जलील अब्बास जिलानी ने कहा है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कभी ऐसा कोई बयान दिया ही नहीं.

उल्लेखनीय है कि दस दिनों पहले परवेज़ मुशर्रफ़ के इस बयान का ज़िक्र करते हुए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसका स्वागत किया था और कहा था कि भारत तो इसका पक्षधर है और जम्मू कश्मीर में एक निर्वाचित सरकार है.

मनमोहन सिंह ने सोमवार को विदेशी पत्रकारों से बात करते हुए भी स्वायत्तता की बात कही थी.

मनमोहन सिंह के स्वागत के बाद पाकिस्तानी विदेश विभाग का कहना है कि जहाँ तक कश्मीर से सेना हटाने की बात है तो पाकिस्तान हमेशा से मानता आया है और इसी के आधार पर कश्मीर के लोगों की रायशुमारी हो सकती है.

उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या के स्थाई हल के लिए परवेज़ मुशर्रफ़ ने पिछले दिनों कई बयान जारी किए हैं.

इन बयानों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा है कि जम्मू कश्मीर की जनता की भावनाओं का आदर करना चाहिए और समस्या का ऐसा हल ढूंढ़ना चाहिए जिससे पाकिस्तान, भारत और कश्मीर तीनों सहमत हों.

स्वायत्त शासन

लेकिन वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा का कहना है कि पाकिस्तान सरकार कूटनीतिक कारणों से परवेज़ मुशर्रफ़ के बयान का खंडन कर रही है.

20 अप्रैल को जिस सम्मेलन में परवेज़ मुशर्रफ़ ने स्वायत्तता वाला बयान दिया था उसमें विनोद शर्मा माजूद थे.

उनका कहना है कि परवेज़ मुशर्रफ़ ने 'सेल्फ़-गवर्नेंस' यानी स्वायत्त शासन की बात कही थी जो कि पाकिस्तान के 'सेल्फ़ डिटरमिनेशन' यानी आत्मनिर्णय की बात से हटने जैसा था.

उनका कहना है कि पाकिस्तान कहता रहा है कि कश्मीर के लोगों को आत्म निर्णय का अधिकार देना चाहिए जिससे वे फ़ैसला कर सकें कि वे पाकिस्तान के साथ जाएँगे या भारत के साथ.

जैसा कि विनोद शर्मा का कहना है, "इस समय नियंत्रण रेखा के दोनों ओर के कश्मीर में जो माहौल है और जिस तरह वे लोग 'आज़ादी' की बात कर रहे हैं उसके चलते पाकिस्तान को अपना रुख़ बदलने की ज़रूरत महसूस हो रही है."

लेकिन चूँकि पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने अपना प्रस्ताव बातचीत की टेबल पर न रखकर सार्वजनिक रुप से रख दिया है इसलिए अब वह रणनीति और कूटनीति के तहत इसका खंडन कर रहा है.

बीबीसी से बात करते हुए विनोद शर्मा ने कहा कि पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता जलील अब्बास जिलानी भी उस कार्यक्रम में थे और उन्होंने भी वह सुना था जो परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा था लेकिन इस समय पाकिस्तान को अपने पुराने रुख़ पर क़ायम दिखना ज़रुरी दिख रहा है.