रविवार, 29 मई, 2005 को 13:58 GMT तक के समाचार
अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में अलगाववादी संगठन हुर्रियत कान्फ्रेंस के कट्टरपंथी माने जाने वाले धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कहा है कि वे पाकिस्तान के न्यौते पर दो जून को यात्रा पर नहीं जाएंगे.
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान ने भारत प्रशासित कश्मीर के कुछ नेताओं को अपने यहाँ आने का न्यौता दिया है जिस पर कुछ कश्मीरी नेता दो जून को बस के ज़रिए पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की यात्रा शुरू करेंगे.
इन नेताओं में हुर्रियत कान्फ्रेंस मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ के नेतृत्व वाले धड़े के नेता, जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट, जम्मू कश्मीर लिबरेशन फोरम और डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के नेता शामिल होंगे.
सैयद अली शाह गिलानी ने बताया कि उनके धड़े के सदस्यों की रविवार को श्रीनगर में बैठक हुई जिसमें मतदान के ज़रिए पाकिस्तान के न्यौते को नामंज़ूर करने का फ़ैसला किया गया.
गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान के न्यौते को ठुकराने का मुख्य कारण कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के जाने-पहचाने रुख़ से भटकाव पर "अपना विरोध दर्ज कराना" है.
अली शाह गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कश्मीर मुद्दे पर भारत सरकार को बहुत सी रियायतें दी हैं लेकिन भारत सरकार अपने रुख़ से ज़रा भी नहीं हिली है.
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान कश्मीरियों के आत्म निर्णय के अधिकार का समर्थन करता रहा है लेकिन अब वह भारत की शक्ति के सामने अपनी मजबूरी दिखा रहा है."
गिलानी ने कहा है, "अब हम अगर पाकिस्तान जाएँ तो किस मुँह से. कोई एजेंडा ही नहीं है और हम यह भी नहीं जानते की हम अगर वहाँ जाएँ तो क्या लेकर वापस लौटेंगे."
उन्होंने कहा कि जो कश्मीरी नेता दो जून के बस के ज़रिए पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का दौरा करेंगे उन्हें कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है.
गिलानी ने भारत सरकार के उस बयान की भी आलोचना की जिसमें कश्मीरी नेताओं को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से बाहर जाने की इजाज़त नहीं देने की बात कही गई थी.
अली शाह गिलानी ने कहा कि कश्मीर समस्या का शांतिपूर्ण समाधान यही हो सकता है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के तहत जनमतसंग्रह कराया जाए.
"इसके अलावा अगर कोई एक मात्र विकल्प है तो वो ये कि त्रिपक्षीय बातचीत की जाए जिसमें भारत, पाकिस्तान और कश्मीर नेता शामिल हों."