शुक्रवार, 27 मई, 2005 को 14:13 GMT तक के समाचार
भारत और पाकिस्तान सियाचिन क्षेत्र में भी युद्ध विराम जारी रखने पर सहमत हुए हैं लेकिन दुनिया के इस सबसे ऊँचे युद्ध क्षेत्र में अपनी सैनिक मौजूदगी कम करने पर कोई सहमति नहीं हुई है.
दोनों देशों के बीच सियाचिन विवाद काफ़ी पुराना है और दोनों देशों के उच्च सैन्य अधिकारी दो दिन की बातचीत के लिए पाकिस्तान के रावलपिंडी में मिले थे.
रावलपिंडी के सेना मुख्यालय में रक्षा सचिव स्तर की यह बातचीत शुक्रवार को समाप्त हुई और इसमें दोनों पक्ष बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं.
बातचीत समाप्ति पर दोनों देशों की तरफ़ से जारी एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा गया है, "दोनों देशों के रक्षा सचिवों के बीच इस बात पर सहमति हुई कि सियाचिन विवाद को हल करने के लिए बातचीत जारी रखी जाएगी."
प्रेस वक्तव्य में कहा गया है, "दोनों पक्षों की बातचीत बेबाक और रचनात्मक रही और बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मंशा भी नज़र आई."
"दोनों पक्षों ने नवंबर 2003 से जारी युद्ध विराम पर संतोष व्यक्त किया और इसे जारी रखने पर सहमत हुए."
आठ सदस्यों वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव अजय विक्रम सिंह ने किया जबकि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई रक्षा सचिव जनरल (रिटायर्ड) तारिक़ वसीम ग़ाज़ी ने की.
सियाचिन मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत का यह अब तक का नौवाँ दौर था और हाल के वर्षों में हुई व्यापक बातचीत का यह दूसरा दौर था.
दोनों देशों के संबंध सुधारने की दिशा में विभिन्न मुद्दों पर विभिन्न स्तरों पर बातचीत चल रही है.
सियाचिन मुद्दे के बाद अब सर क्रीक विवाद पर बातचीत होगी जो शनिवार को शुरू होगी.
विवाद
सियाचिन दुनिया का सबसे ऊँचा युद्ध क्षेत्र है जो समुद्र तल से क़रीब 5500 मीटर की ऊँचाई पर है.
कश्मीर क्षेत्र में स्थित इस ग्लैशियर पर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद है. पाकिस्तान का आरोप है कि भारत ने 1984 में उस स्थान तक अपनी सैनिक मौजूदगी बढ़ा ली थी जिसे पाकिस्तान अपने क्षेत्र बताता है.
लेकिन भारत ने इस आरोप को ग़लत क़रार दिया था और पाकिस्तान ने भी जब अपने सैनिक वहाँ तैनात कर दिए तो छोटे स्तर पर संघर्ष शुरू हो गया था.
दोनों देशों के अधिकारी स्वीकार करते हैं कि बीस साल से जारी इस संघर्ष में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें से ज़्यादातर मौतें सियाचिन के ख़राब मौसम की वजह से हुईं न कि दुश्मन की गोलियों से.
पाकिस्तानी का कहना है कि 1989 में यह सहमति हुई थी कि भारत अपनी पुरानी स्थिति पर वापिस लौट जाएगा लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ और एक अविश्वास की स्थिति पैदा हो गई.
पाकिस्तान ज़ोर देता रहा है कि 1989 के समझौते को लागू किया जाए और दोनों देशों की सेना 1984 से पहले की स्थिति पर वापस लौटें.