मंगलवार, 24 मई, 2005 को 20:56 GMT तक के समाचार
नगेंदर शर्मा
दिल्ली से बीबीसी संवाददाता
गोधरा रेल काँड की जाँच कर रहे एक आयोग के अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आतंकवाद के मामले हटाने की सिफ़ारिश की है.
इस आयोग के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि जाँच में किसी तरह की आतंकवादी गतिविधि का प्रमाण नहीं पाया गया है.
फ़रवरी 2002 में गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग में 58 हिंदू श्रद्धालु मारे गए थे जिसके बाद गुजरात में भड़के दंगे में लगभग 1000 लोगों की जान चली गई.
गोधरा मामले में कई लोगों को आतंकवाद निरोधी क़ानून पोटा के तहत, संदेह के आधार पर हिरासत में लिया गया था लेकिन वह क़ानून अब निरस्त हो चुका है.
गोधरा कांड की जाँच के लिए यूपीए सरकार ने पिछले वर्ष उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में एक तीन सदस्यों वाली समिति गठित की थी.
इस समिति ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और गुजरात सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.
सिफ़ारिशे
समिति का कहना है कि गोधरा स्टेशन पर रेल के डिब्बे में आग यात्रियों और स्टेशन पर सामान बेचनेवालों के बीच तनातनी के बाद लगी जिनमें अधिकतर मुसलमान थे.
आयोग के एक अधिकारी ने बिना नाम सार्वजनिक किए बीबीसी को बताया कि समिति ने ये सिफ़ारिश की है कि सभी 120 अभियुक्तों पर भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत मुक़दमा चलाया जाना चाहिए.
इनमें हत्या, आगजनी और दंगे जैसे अपराध शामिल हैं.
इस आयोग के चेयरमैन न्यायमूर्ति एस सी जैन ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने और उनको सहकर्मियों ने गुजरात में पोटा के तहत चल रहे सभी मामलों की समीक्षा कर ली है.
उन्होंने कहा,"हमारी सिफ़ारिशें अब गृह मंत्रालय और गुजरात सरकार के पास हैं".
गुजरात के गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि राज्य सरकार को आयोग की रिपोर्ट मिली है और वो इसे न्यायालय के सामने पेश करेगी.
प्रेक्षकों की राय है कि इस रिपोर्ट के आने के बाद भारतीय जनता पार्टी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.