रविवार, 22 मई, 2005 को 16:11 GMT तक के समाचार
नेपाल में लोकतांत्रिक सरकार को बर्ख़ास्त कर सत्ता अपने हाथ में ले लेने के राजा ज्ञानेंद्र के फ़ैसले के ख़िलाफ़ रविवार को नेपाल में विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया.
विरोध प्रदर्शनों में विपक्ष के हज़ारों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया. विपक्षी नेताओं का कहना है कि प्रदर्शन आम तौर पर शांतिपूर्ण रहा. हालाँकि एक-दो जगहों पर पुलिस ने दख़ल देने की कोशिश की.
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि संसद को फिर से बहाल किया जाए और सर्वदलीय सरकार का गठन हो. फरवरी में नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने यह कहते हुए सरकार बर्ख़ास्त कर दी थी कि वह माओवादी विद्रोहियों से निपटने में नाकाम रही है.
रविवार के विरोध प्रदर्शन का आह्वान नेपाल की सात विपक्षी पार्टियों ने किया था. राजधानी काठमांडू में विपक्षी दलों के कार्यकर्ता ने अपनी-अपनी पार्टी का झंडा लेकर प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए.
नेपाली कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (यूएमएल) सहित विपक्षी पार्टियों के चार हज़ार कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया.
नारेबाज़ी
उन्होंने नेपाल नरेश के क़दम के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की और देश में लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की बहाली की मांग की. पोखरा, बिराटनगर और जनकपुर जैसे अन्य शहरों में हज़ारों विपक्षी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया.
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) ने कहा है कि एक स्थान पर पुलिस और कार्यकर्ताओं में झड़प हुई जिसमें कई लोग घायल हो गए.
पार्टी के अनुसार पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया है जिनमें एक पूर्व सांसद भी हैं. विपक्षी पार्टियों का तर्क है कि सर्वदलीय सरकार के गठन से एक माहौल बनेगा और माओवादी विद्रोहियों के साथ शांति वार्ता शुरू हो पाएगी.
विपक्षी पार्टियों की मांग पर शाही सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. शाही सरकार के कई मंत्रियों ने विपक्ष की मांग को ग़ैर ज़रूरी बताया है और कहा है कि विपक्ष राजा का समर्थन करें ताकि देश में क़ानून-व्यवस्था क़ायम की जा सके.
लेकिन विपक्ष का कहना है कि देश में उस समय तक शांति व्यवस्था बहाल नहीं हो सकती जब तक लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार न बहाल हों.