गुरुवार, 19 मई, 2005 को 04:36 GMT तक के समाचार
उड़ीसा हाई कोर्ट ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स की हत्या के मामले में मुख्य अभियुक्त दारा सिंह की मौत की सज़ा को कम कर उम्र क़ैद कर दिया है.
इसके पहले एक विशेष अदालत ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या के मामले में दारा सिंह को मौत की सज़ा सुनाई थी.
जस्टिस सुजीत बर्मन रॉय और जस्टिस लक्ष्मीकांत महापात्र की खंडपीठ ने इस मामले में 11 अन्य लोगों को बरी कर दिया.
इसके पहले जिला और सत्र न्यायाधीश एम एन पटनायक ने दारा सिंह को मौत की सज़ा और 12 अन्य को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.
लेकिन हाई कोर्ट ने केवल महेंद्र हेम्ब्रम की उम्र क़ैद की सज़ा बहाल रखी.
हालाँकि अदालत ने सज़ा में इस बदलाव की कोई वजह नहीं बताई है.
हत्या
ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटों दस वर्षीय फ़िलिप और आठ वर्षीय तिमोथी को जनवरी 1999 में एक उग्र भीड़ ने ज़िंदा जला दिया था. उस वक्त वे अपने जीप के भीतर सो रहे थे.
इस घटना पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी.
यह घटना उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से 165 किलोमीटर दूर मनोहरपुर में हुई थी.
स्टेन्स उड़ीसा के जनजातीय इलाक़ों में कुष्टरोगियों के बीच कल्याण कार्यों में लगे थे.
इस मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने की.
उनकी विधवा ग्लैडिस स्टेन्स ने अपने पति और बेटों की हत्या में शामिल लोगों को व्यक्तिगत तौर पर पहले ही माफ़ करने की घोषणा कर दी थी.