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गुरुवार, 19 मई, 2005 को 00:55 GMT तक के समाचार

घाटे वाले उपक्रमों को बंद करेंगे बुद्धदेब

भारत के पश्चिम बंगाल राज्य की सरकार ने कहा है कि वह घाटे में चल रहे सभी सरकारी उपक्रमों को या तो बंद कर देगी या फिर उनके निजीकरण का प्रयास करेगी.

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने कहा है कि उनकी सरकार इन उपक्रमों से हो रहे घाटे को बर्दाश्त करने में असमर्थ है.

सूत्रों के अनुसार सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलितब्यूरो ने इस फ़ैसले को लागू करने की अनुमति दे दी है.

कोलकाता भारतीय उद्योग संघ में उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के इन उपक्रमों से कोई डेढ़ अरब डॉलर का सालाना घाटा उठा रही है.

उन्होने कहा,"हम इतना घाटा बर्दाश्त नहीं कर सकते और हमें विनिवेश करना होगा."

उन्होने फिर वह नारा दोहराया कि सुधरो या नष्ट हो जाओ. उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे उपक्रमों का पुनर्गठन किया जाएगा, जिनमें वित्तीय संस्थाओं ने निवेश करने की दिलचस्पी दिखाई है.

साथ ही उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को बचाया जा सकता है उन्हें निजी कम्पनियों को बेचने की कोशिश की जाएगी.

हालाँकि मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने ये भी कहा कि निजी हाथों में दी गई इन कंपनियों में सरकार अपना कुछ हिस्सा रखेगी.

राज्य बिजली बोर्ड, कोलकाता ट्राम कम्पनी और राज्य पर्यटन निगम का पूरी तरह पुनर्गठन किया जाएगा ताकि वो मुनाफ़ा कमाने लायक बन सकें.

इस संरचनात्मक और विनिवेश कार्यक्रम के लिए केन्द्र सरकार ने कोई दो अरब डॉलर का अनुदान दिया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि केन्द्र सरकार पर सहयोगी वामपंथी दलों की तरफ़ से ये दबाव रहता है कि वह सुधारों को धीरे धीरे लागू करे.

अब पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार ने स्वयं विनिवेश करने का फ़ैसला किया है जिससे केन्द्र को अपनी आर्थिक नीतियों को आगे बढ़ाने का बहाना मिल जाएगा.

जानकारों का कहना है कि वामदल जिन सुधारों को राज्य में लागू कर रहे हैं उनका केन्द्रीय स्तर की राजनीति में विरोध करना उनके लिए कठिन होगा.