मंगलवार, 17 मई, 2005 को 11:26 GMT तक के समाचार
भारत के प्रमुख रक्षा वैज्ञानिक ने कहा है कि भारत इस साल के अंत तक 3000 किलोमीटर तक की अग्नि-3 मिसाइल का परीक्षण करेगा.
दूसरी ओर भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अंतराराष्ट्रीय जगत से भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए परमाणु तकनीक देने का अनुरोध किया है.
भारत के रक्षा वैज्ञानिक डॉक्टर एम नटराजन ने रक्षा अनुसंधान संस्थान के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की उपस्थिति में घोषणा की कि अग्नि-3 मिसाइल पर काम चल रहा है और यह निर्धारित योजना के अनुसार इस वर्ष के अंत तक प्रक्षेपित की जाएगी.
उल्लेखनीय है कि इसके पहले अग्नि-3 का प्रक्षेपण दो बार स्थगित करना पड़ा था.
तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने इसके सन् 2003 के अंत में प्रक्षेपण की घोषणा की थी.
लेकिन बाद में इस मिसाइल के मध्य 2004 में प्रक्षेपण करने की बात कही गई थी.
इधर, प्रधानमंत्री ने कहा है कि भारत ज़िम्मेदार परमाणु संपन्न देश है और देश में परमाणु अप्रसार संबंधी क़ानून बनने के बाद भारत को तकनीक हस्तांतरण से इनकार नहीं किया जाना चाहिए.
मनमोहन सिंह का कहना था कि देश के पास उपलब्ध परमाणु तकनीक अथवा अंतरराष्ट्रीय सहयोग से हासिल की गई तकनीक की सुरक्षा की भारत ने कड़ी व्यवस्था की है.
उल्लेखनीय है कि भारत ने हाल ही में सामूहिक विनाश के हथियार यानी डब्ल्यूएमडी और उनसे जुड़ी ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने वाले विधेयक को पारित किया है.
वचनबद्ध
भारत का कहना है कि सामूहिक विनाश के हथियारों को असामाजिक तत्वों और चरमपंथियों के हाथों में पड़ने से रोकने के लिये वचनबद्ध है.
इसके साथ ही सामूहिक विनाश के हथियार और उसके प्रक्षेपण प्रणाली विधेयक-2005 से सरकार के पास ऐसे हथियारों के प्रसार को रोकने की क़ानूनी ताकत आ गई है.
सरकार का कहना है कि भारत के परमाणु हथियार संपन्न देश होने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के कारण इस विधेयक को पेश करने की ज़रूरत महसूस हुई.
भारत का कहना है कि उसकी शुरू से ही यह नीति रही है कि किसी अन्य देश को सामूहिक विनाश के हथियार, परमाणु हथियार और ऐसे किसी अन्य विस्फोटक बनाने में मदद नहीं करेगा.