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मंगलवार, 17 मई, 2005 को 14:26 GMT तक के समाचार

'कश्मीर में आत्मघाती हमले जायज़'

पाकिस्तान के 58 धार्मिक नेताओं यानी उलेमा ने एक फ़तवा जारी किया है जिसमें कहा गया है किसी इस्लामी देश में सार्वजनिक स्थलों पर आत्मघाती हमला करना इस्लाम की नज़र में हराम है.

लेकिन लाहौर में जारी किए इस फ़तवे में यह भी कहा गया है कि फ़लस्तीन और कश्मीर में सार्वजनिक स्थलों पर होने वाले आत्मघाती हमले इस फ़तवे के दायरे से बाहर हैं क्योंकि वहाँ दबे-कुचले मुसलमान आज़ादी की जद्दोजहद कर रहे हैं.

फ़तवा जारी करने वाले उलेमा का कहना है कि यह सिर्फ़ पाकिस्तान को ध्यान में रखकर जारी किया गया है क्योंकि पाकिस्तान में धर्म के नाम पर बेकसूर मुसलमानों का ख़ून बहाया जा रहा है.

भारत में दिल्ली की फ़तेहपुरी मस्जिद के इमाम मुफ़्ती मोहम्मद मुकर्रम ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में इस फ़तवे के बारे में कहा है कि "आत्मघाती हमले हर हाल में नाजायज़ हैं चाहे जगह कोई भी हो."

मुफ़्ती मुकर्रम का मानना है कि लोग जिहाद का ग़लत मतलब निकालते हैं, "पैगंबर हज़रत मोहम्मद ने भी जिहाद किया था लेकिन वे तभी लड़े थे जब उन पर हमला हुआ, वे अपनी हिफ़ाज़त के लिए लड़े लेकिन अभी जो हो रहा है वह तो कुछ और ही है."

वे कहते हैं, "जिहाद का तरीक़ा ये है कि जिससे हमारी लड़ाई है हम पहले उसको चुनौती दें और फिर उसका सामना करें, लेकिन आम लोगों और मासूम लोगों पर हमले करना, क़त्लो-ग़ारत करना इस्लाम इसकी इजाज़त क़तई नहीं देता. यह सरासर नाजायज़ है."

पाकिस्तान के उलेमा ने कहा कि "पाकिस्तान में पिछले पंद्रह वर्षों में अनेक आत्मघाती हमले हुए हैं जिनमें जान-माल का भारी नुक़सान हुआ है इसलिए इस पर फ़तवा जारी करने की बहुत ज़रूरत थी."

लाहौर में संवाददाता सम्मेलन करके जारी किए फ़तवे का ऐलान मुफ़्ती मुनीब उर रहमान ने किया जो कि रूवत-ए-हिलाल कमेटी के चेयरमैन हैं, उन्होंने कहा कि "जो लोग सार्वजनिक स्थलों पर इस्लाम के नाम पर हमला कर रहे हैं उन्हें मुसलमान नहीं माना जाना चाहिए."

मुफ़्ती मुनीब उर रहमान ने ज़ोर देकर कहा कि मस्जिदों और इमामबाड़ों जैसे धार्मिक स्थलों पर आत्मघाती हमले करना पूरी तरह ग़लत है और इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए.

मुफ़्ती मुनीब उर रहमान ने कहा कि यह मानना ग़लत है कि धार्मिक नेता चरमपंथियों को आत्मघाती हमले करने के लिए उकसाते हैं.

पाकिस्तान के कुछ धार्मिक नेताओं ने भी इस फ़तवे पर आपत्ति प्रकट की है और इसे ग़ैरज़रूरी बताया है.

लाहौर के एक प्रमुख मदरसे, जामिया नईमिया के प्रमुख सरफ़राज नईमी ने इस फ़तवे पर दस्तख़त करने से इनकार कर दिया है, उनका कहना है कि इस फ़तवे पर उन्हें ऐतराज़ है.

नईमी ने कहा, "इस तरह के फ़तवे से काफ़िरों और अमरीका को फ़ायदा होगा जो अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में बेकसूर मुसलमानों का ख़ून बहा रहे हैं."