मंगलवार, 10 मई, 2005 को 15:41 GMT तक के समाचार
तालेबान के शीर्ष नेता मुल्ला उमर अफ़ग़ानिस्तान सरकार की ओर से माफ़ी दिए जाने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे.
तालेबान के एक प्रवक्ता अब्दुल लतीफ़ हक़ीमी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा है, "हमें सुरक्षा की गारंटी की ज़रूरत नहीं है."
सोमवार को अफ़ग़ानिस्तान के मसालेहत कमीशन (मेल मिलाप आयोग) ने मुल्ला उमर को एक राष्ट्रीय क्षमादान कार्यक्रम के तहत माफ़ी देने का प्रस्ताव रखा था.
वर्ष 2001 में तालेबान के पतन के बाद से मुल्ला उमर की तलाश जारी है.
हक़ीमी ने कहा, "मुल्ला उमर के निर्देश पर ही हमने पिछले कुछ हफ़्तों में अमरीकी सैनिकों पर हमले तेज़ कर दिए हैं और यह जारी रहेगा."
अमरीकी सेना का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में तालेबान छापामार मारे गए हैं लेकिन साथ ही अफ़ग़ान सैनिक को भी जान गँवानी पड़ी है.
अफ़ग़ानिस्तान सरकार तालेबान के लड़ाकों के लिए आम माफ़ी की योजना चला रही है लेकिन अब तक इसमें बड़े नेता शामिल नहीं रहे हैं, उन लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा जिनके ऊपर मानवाधिकार हनन के आरोप हैं.
मेल मिलाप आयोग के प्रमुख सिबाग़तुल्ला मोजाद्ददी ने क्षमादान की योजना को और व्यापक बनाने पर ज़ोर दिया है.
मोजाद्ददी का कहना है कि अगर मुल्ला उमर और कबायली सरदार गुलबुद्दीन हिक़मतयार हथियार डालने पर राज़ी हों तो उन्हें माफ़ी दे देनी चाहिए.
उन्होंने सोमवार को कहा, "अगर ये लोग हथियार डालकर, संविधान और सरकार का सम्मान करें तो इन्हें माफ़ी दे देनी चाहिए, हमारी शर्तें बहुत बड़ी नहीं हैं."
अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्रपति हामिद करज़ई की सरकार मुल्ला उमर को क्षमादान देने के प्रस्ताव से सहमत है या नहीं, लेकिन अमरीकी सेना इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ है.
अमरीकी सेना के प्रवक्ता ने कहा, "हमारा मानना है कि जिन लोगों ने गंभीर अपराध किए हैं उन्हें अपनी करनी का फल भुगतना चाहिए, मेरा मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान की सरकार इस बात को समझती है और उससे सहमत है."