सोमवार, 09 मई, 2005 को 16:28 GMT तक के समाचार
कंडोम का इस्तेमाल और वो भी ग़लत. हैरत में पड़ गए न आप. पिछले दिनों ज़िम्बाब्वे से ये ख़बर आई थी कि कंडोम का इस्तेमाल चूड़ियाँ बनाने में हो रहा है.
अब भारत से ये ख़बरें आ रहीं हैं कि कंडोम का इस्तेमाल साड़ियाँ तैयार करने में किया जा रहा है. इसने अधिकारियों की नींद भी उड़ा दी है.
दरअसल अख़बारों में इस तरह की रिपोर्टें आई हैं कि जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर मुफ़्त बाँटे जाने वाले कंडोम का इस्तेमाल साड़ी तैयार करने में किया जा रहा है.
रिपोर्ट के बाद चिंतित अधिकारियों ने इसका अध्ययन करने की योजना बनाई है. मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि हर साल एक अरब से ज़्यादा बाँटे जाने वाले कंडोम में से एक तिहाई कंडोम का ग़लत इस्तेमाल हो रहा है.
भारत सरकार हर साल एचआईवी के संक्रमण से बचने और आबादी नियंत्रित करने के लिए एक अरब कंडोम मुफ़्त बँटवाती है.
रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ इन मुफ़्त कंडोम के ग़लत इस्तेमाल में शामिल है- इससे साड़ी बनाना. साड़ी बनाने वाले बुनकर कंडोम का इस्तेमाल अपने करघा पर करते हैं.
दरअसल कंडोम में चिकनाई युक्त पदार्थ होता है और करघा पर लगाने से उसके धागे तेज़ी से चलते हैं और उनमें चमक भी आ जाती है. इसके अलावा कंडोम का इस्तेमाल बैलून बनाने में भी होता है.
और तो और लॉरी ड्राइवर इसका इस्तेमाल तेल रिसाव को रोकने के लिए भी करते हैं.
हालाँकि सरकारी अधिकारियों का कहना है कि ये कहना कि बाँटे जाने वाले कंडोम के एक तिहाई का ग़लत इस्तेमाल हो रहा है, मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना है.
अधिकारियों का कहना है कि वे इस रिपोर्ट का जवाब अपनी ओर से सर्वे कराने के बाद देंगे. एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि जब कोई चीज़ मुफ़्त में बाँटी जाती है, तो उसका ग़लत इस्तेमाल होता ही है.
लेकिन अधिकारी ने नि:शुल्क कंडोम बाँटे जाने वाले कार्यक्रम का बचाव किया और कहा कि यह जारी रहेगा. स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि असली चुनौती लोगों को शिक्षित करने की है.