शुक्रवार, 06 मई, 2005 को 07:38 GMT तक के समाचार
अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में मेनिंजाइटिस से अब तक 15 मौतें हो चुकी हैं.
इसके अलावा 100 से अधिक लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं जिसके कारण दिल्ली सरकार को सतर्कता बरतने का आदेश जारी करना पड़ा है.
लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ए रामदॉस ने संसद में बताया कि इसने अभी महामारी का रूप नहीं लिया है.
हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस संबंध में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जिसमें मेनिंजाइटिस के फैलने की समीक्षा की गई.
मेनिंजाइटिस में मस्तिष्क में सूजन आ जाती है जिससे विकलांगता आ सकती है अथवा मौत तक हो सकती है.
दो दशक पहले भारत में मेनिंजाइटिस के कारण लगभग 800 लोगों की मौत हो गई थी. इसमें से दिल्ली के 70 लोग शामिल थे.
दिल्ली सरकार ने इस संक्रमण की जानकारी के लिए विज्ञापन अभियान छेड़ा है और स्वास्थ्य अधिकारियों को पूरी सतर्कता बरतने के आदेश दिए हैं.
इस मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सलाह दी है कि जो स्वास्थ्य कर्मचारी इसके मरीजों के इलाज में लगे हुए हैं, उन सभी को इससे बचाव के लिए टीके लगाए जाने चाहिए.
इधर हरियाणा में इसको लेकर सतर्कता बरतने के आदेश दिए हैं.
हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि पूरे राज्य में सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे मेनिंजाइटिस को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतें.
लक्षण
मेनिंगोकोकल संक्रमण में तेज़ बुखार आता है, सिर दर्द, उल्टी, गर्दन में अकड़न होती है और मरीज को दौरा भी पड़ सकता है.
साथ ही त्वचा पर खुजली या फिर नीले या बैंगनी रंग के चकत्ते नज़र आते हैं और मरीज बेहोश भी हो सकता है.
यह संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है. इसके इलाज में एंटीबायोटिक्स प्रभावी साबित होते हैं.
इसमें रोगियों को बिल्कुल अलग जगह रखा जाना चाहिए.
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे भीड़-भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें.
साथ ही लोगों को हिदायत दी गई है कि वे संक्रमित व्यक्ति के भोजन, कपड़े और बर्तनों का इस्तेमाल न करें.