अमरीका ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान और इसराइल सहित तमाम देशों को परमाणु अप्रसार संधि के दायरे के भीतर आना ही होगा और ऐसे देशों को अगर तमाम दुनिया से अच्छे संबंध बनाने हैं तो इस संधि का पालन करना ही होगा.
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्कॉट मैकलैलन ने मंगलवार को वाशिंगटन में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मेरा ख़याल है कि एक बात पर फिर से ज़ोर दिया जाएगा या दोहराई जाएगा कि हम मानते हैं कि परमाणु अप्रसार संधि को पूरी दुनिया में माना जाना चाहिए."
स्कॉट मैकलैलन से सवाल पूछा गया था कि क्या अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश भारत, पाकिस्तान और इसराइल को इस संधि के दायरे में लाने के लिए कोई दबाव डालने जा रहे हैं.
ग़ौरतलब है कि भारत, पाकिस्तान और इसराइल तीनों ही परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं और तीनों ने ही परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तख़त नहीं किए हैं.
परमाणु अप्रसार संधि में सिर्फ़ पाँच देशों - अमरीका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस और चीन को ही परमाणु हथियार रखने की इजाज़त है लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है परमाणु शक्ति संपन्न देश अपने हथियारों को त्याग देंगे.
लेकिन परमाणु हथियारों के विरोधियों का कहना है कि इन पाँच देशों ने भी परमाणु अप्रसार के लिए कुछ ठोस नहीं किया है.
भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण 1974 में किया था और उसके बाद 11 और 13 मई, 1998 को भी वह परमाणु परीक्षण कर चुका है.
उसके कुछ ही दिन बाद पाकिस्तान ने भी परमाणु परीक्षण किए थे. भारत और पाकिस्तान दोनों ही ऐसी मिसाइलों के भी सफल परीक्षण कर चुके हैं जिन पर परमाणु हथियार लादे जा सकते हैं.
अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रिचर्ड बाउचर ने भी सोमवार को भारत और पाकिस्तान की परमाणु हथियार क्षमताओं के बारे में कुछ इसी तरह के विचार व्यक्त किए थे.
रिचर्ड बाउचर से यह पूछा गया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान का ज़िक्र क्यों नहीं किया कि क्या दक्षिण एशिया के ये दोनों देश परमाणु हथियारों के बिना अच्छी तरह नहीं रह सकते हैं.
इस सवाल के जवाब में बाउचर ने कहा था, "मैं ऐसा नहीं मानता हूँ लेकिन मैं इस बारे में भी आश्वस्त हूँ कि दोनों देश इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे."
रिचर्ड बाउचर ने कहा, "हम इस बात की हिमायत करते हैं कि इस संधि को सभी देश मानें. हमने तो उन अतिरिक्त प्रावधानों की भी हिमायत की है जिसमें अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को सुरक्षा परिषद के किसी भी अस्थायी देश के परमाणु संयंत्रों का मुआयना करने की इजाज़त हो."