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मंगलवार, 03 मई, 2005 को 12:46 GMT तक के समाचार

मोहम्मद फ़ैसल अली
बीबीसी संवाददाता, भोपाल

मध्य प्रदेश में पेप्सी, कोक पर प्रतिबंध

मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी आयोजनों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शीतलपेयों - पेप्सी और कोका-कोला के उपयोग पर पाबंदी लगा दी है.

मुख्यमंत्री बालूलाल गौर ने निर्देश दिए हैं कि इनकी जगह स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभदायक और अपेक्षाकृत कम क़ीमत के मट्ठा और आँवले आदि के शरबत जैसे देसी पेय ही उपयोग में लाए जाएँ.

राज्य के जनसंपर्क विभाग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि राज्य सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग को इस संबंध में आदेश जारी करने के लिए भी कहा है.

मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने हाल ही इस आशय का एक मौखिक आदेश दिया था जिसे अब औपचारिक रूप दिया जा रहा है.

क़रीब एक पखवाड़ा पहले हिंदू धार्मिक स्थलों वाले तीन नगरों - ओरछा, मैहर और चित्रकूट को पवित्र नगर का दर्जा देने की घोषणा करते समय भी उन्होंने कुछ ऐसा ही कहा था.

उन्होंने कहा था कि इन स्थानों में होने वाले सरकारी कार्यक्रमों में शीतल पेयों की जगह छाछ, लस्सी और श्रीखंड परोसे जाने चाहिए.

आलोचना

सरकार के इस फ़ैसले को राजनीतिक पार्टियों ने जनता में सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए उठाया गया क़दम बताया है.

कांग्रेस प्रवक्ता मानक अग्रवाल ने कहा कि शीतल पेयों पर इस तरह की कोई पाबंदी ठीक नहीं है.

वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य प्रमोद प्रधान का सवाल था कि जो सरकार हर क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का रास्ता खोल रही है वह इस क़दम से क्या साबित करना चाहती है.
उन्होंने इसे 'दिखावा' मात्र बताया.

कुछ लोग इसे मुख्यमंत्री का अपने पैतृक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सामने अपनी 'साख' बढ़ाने वाला क़दम मान रहे हैं.

आरएसएस विदेशी कंपनियों और उनकी चीज़ों की जगह देसी वस्तुओं के उपयोग का पक्षधर रहा है और इनपर रोक की माँग वह केंद्र की पूर्व अटल बिहारी वाजपेयी सरकार से भी करता रहा था.