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मंगलवार, 26 अप्रैल, 2005 को 14:18 GMT तक के समाचार

सीमा चिश्ती
संपादक, बीबीसी हिंदी, दिल्ली

लालू के बयान पर संसद में टकराव

गुजरात में 21 अप्रैल को हुई रेल दुर्घटना पर रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के बयान को लेकर संसद में तीखी बहस हो रही है और मंगलवार को दूसरे दिन भी जमकर हंगामा हुआ.

ताज़ा ख़बर के अनुसार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने घोषणा की है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वह संसद की कार्यवाही का तीन दिन तक बहिष्कार करेगा.

लोकसभा में पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने लालू प्रसाद यादव के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव को नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

उधर लालू प्रसाद यादव ने कहा कि उन्होंने अपने बयान में जो कहा है वह उस पर अटल हैं.

मंगलवार को लोक सभा की कार्यवाही शुरू होते ही यह स्पष्ट हो गया था कि माहौल गरम रहेगा.

लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी बजट सत्र में वित्तीय मामलों पर बहस नहीं होने को बहुत गंभीरता से ले रहे थे. उन्होंने कहा कि यदि ज़रूरत महसूस हुई तो वह पद से हटने से भी नहीं हिचकिचाएंगे.

सोमनाथ चटर्जी ने कहा, “कृपया मेरा नहीं तो कम से कम अध्यक्ष के आसन का सम्मान करें. ये कुर्सी सदन का प्रतिनिधित्व करती है."

"मैंने कभी इस पर बैठने का सपना भी नहीं देखा. यदि आपको लगता है कि मैं इसके योग्य नहीं हूँ तो मैं इसे छोड़ने के लिए तैयार हूं.”

लोकसभा में कम से कम प्रश्नकाल में विध्न न डालने की परंपरा रही है लेकिन मंगलवार को प्रश्नकाल में भी रेल मंत्री लालू प्रसाद के रेल दुर्घटना और उनपर हमले के संबंध में दिए गए बयान की ही चर्चा हुई.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लालू प्रसाद के इस्तीफ़े की माँग की और इस पर सख़्त विरोध व्यक्त किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बजरंग दल जैसे संगठनों पर आरोप लगाए गए हैं.

टकराव

उधर लालू प्रसाद ने आरोप लगाया कि मर्यादा का उल्लंघन विपक्ष कर रहा है.

लालू प्रसाद जब सदन में बोल रहे थे तब विपक्ष उनके स्पष्टीकरण को नहीं सुना जिसकी वजह से विपक्ष और सत्तापक्ष में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई.

बहरहाल, रेल मंत्री लालू प्रसाद ने पूर्व प्रधानमंत्री की पूरी बात सुनी. वह अपने बयान पर अटल रहे.

कुल-मिलाकर विपक्ष ने कहा कि रेल मंत्री ने संघ परिवार पर जो आरोप लगाए हैं उन्हें संसद के रिकॉर्ड से हटा दिया जाना चाहिए, रेल मंत्री को त्यागपत्र देना चाहिए और विशेषकर ऐसे संदर्भ में जब उनके ख़िलाफ़ अदालत ने आरोप तय किए हैं.

उल्लेखनीय है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने बयान में कहा था कि जब वह दुर्घटनास्थल का दौरा कर रहे थे और घायलों से मिलने अस्पताल गए थे तो आरएसएस, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया था.

अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि एक दूसरे पर अनर्गल आरोपों से सदन की कार्यवाही नहीं चल सकती.

उन्होंने कहा कि रेल दुर्घटना के बाद कर्मचारियों को तो बर्ख़ास्त कर दिया गया लेकिन रेलमंत्री बने हुए हैं और उन्हें भी नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

इस बीच विपक्ष की टोका-टाकी जारी रही और फिर वह "लालू प्रसाद यादव इस्तीफ़ा दो" के नारे लगाते रहे.

हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही एक बार फिर स्थगित कर दी गई.