गुरुवार, 21 अप्रैल, 2005 को 03:14 GMT तक के समाचार
भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बेहतर करने के तहत भारत-पाक नियंत्रण रेखा के दोनो तरफ़ कश्मीर को जोड़ने वाली श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा का सफ़र आगे बढ़ा है.
दोनों तरफ़ से चली बसें अपनी-अपनी मंज़िलों पर सुरक्षित पहुँच गईं. हालाँकि चरमपंथियों ने इस सफ़र में बाधा पहुँचाने की धमकियाँ दी थीं.
श्रीनगर से चली बस पहले मुज़फ़्फ़राबाद पहुँची और मुज़फ़्फ़राबाद से चली बस श्रीनगर ज़रा देर से पहुँची.
इस तरह इन बसों का दूसरा सफ़र बिना किसी अप्रिय घटना के पूरा हो गया.
गुरूवार को श्रीनगर से दूसरी बार बस मुज़फ़्फ़राबाद के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना हुई है.
श्रीनगर से चली बस में 28 यात्री थे और उनमें से कुछ को नियंत्रण रेखा की तरफ़ बढ़ते समय ही बिठाया गया.
असली बस से क़रीब दस मिनट पहले दो नक़ली बसें रवानी की गईं जिनमें सुरक्षा कर्मी सवार थे.
मुज़फ़्फ़राबाद से चली बस में 25 यात्री सवार थे जिनमें 14 भारत प्रशासित कश्मीर के लोग थे जो पहली बस में श्रीनगर से मुज़फ़्फ़राबाद गए थे.
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से लौटीं ग़ुलाम फ़ातिमा का कहना था, "मुझे अब भी यक़ीन नहीं हो रहा है कि मैं मुज़फ़्फ़राबाद देखकर आई हूँ. मैं अपनी बेटी और दामाद से तीन दशकों के बाद मिली थी इसलिए वे लम्हे अदभुत थे."
सरकारी सेवा से रिटायर्ड एक अधिकारी ख़ालिद हसन भी मुज़फ़्फ़राबाद देखकर लौटे तो उनका कहना था, "यहाँ और वहाँ कोई फ़र्क़ नहीं है. ज़िंदगी एक जैसी है, लोग एक जैसे ही कपड़े पहनते हैं, माहौल भी एक जैसा ही है."
बस सेवा
श्रीनगर और मुज़फ़्फ़राबाद के बीच सात अप्रैल को ये बस सेवा शुरू हुई थी और इसे भारत-पाकिस्तान रिश्तों को बेहतर करने की ओर एक बड़ा कदम माना गया था.
गुरुवार को सुरक्षा कारणों से ही बस के रवाना होने का स्थान भी बदल दिया था और बस के रास्ते पर कड़ी चौकसी थी.
सुरक्षा इंतज़ाम इतने कड़े थे कि बच्चों को भी स्कूल जाने से रोका गया और सुरक्षा कर्मियों को बच्चों से कहते देखा गया कि आज स्कूलों की छुट्टी है.
पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान बस के रास्ते के दोनों तरफ़ इमारतों पर मोर्चा संभाले हुए थे.
ग़ौरतलब है कि सात अप्रैल को दोनों तरफ़ के कश्मीर के बीच बस सेवा शुरू हुई थी जोकि 1947 में देश विभाजन के बाद श्रीनगर और मुज़फ़्फ़राबाद के बीच पहला सीधा सड़क संपर्क था.