मंगलवार, 19 अप्रैल, 2005 को 07:02 GMT तक के समाचार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख केएस सुदर्शन की राय का समर्थन करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कहा है कि अधिक उम्र के नेताओं को सेवानिवृत हो जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि वे ख़ुद तो किसी पद पर नहीं हैं और पद से हटने का फ़ैसला पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी को और पार्टी को करना है.
सुदर्शन की राय पर वाजपेयी ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है.
दूसरी ओर विश्वहिंदू परिषद ने भी एक बार फिर सुदर्शन की सलाह का समर्थन करते हुए कहा है कि लालकृष्ण आडवाणी को हट जाना चाहिए.
उल्लेखनीय है कि एक टेलीविज़न चैनल को दिए गए साक्षात्कार में संघ के प्रमुख सुदर्शन ने सलाह दी थी कि अटलबिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी दोनों की उम्र अधिक हो गई है और अब उन्हें सेवानिवृत हो जाना चाहिए.
सुदर्शन ने सलाह दी थी कि पार्टी की ज़िम्मेदारी अब अपेक्षाकृत युवा लोगों को सौंप देनी चाहिए.
'आडवाणी तय करें'
संघ प्रमुख सुदर्शन की सलाह पर प्रतिक्रिया पूछने पर वाजपेयी ने संसद परिसर में पत्रकारों से कहा, "अच्छा परामर्श है."
उन्होंने अपने सेवानिवृत्ति के बारे में कहा, "मैं किसी पद पर नहीं हूँ और पहले से ही कोई काम नहीं कर रहा हूँ."
और भाजपा अध्यक्ष आडवाणी के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, "आडवाणी जी पद पर हैं, वो फ़ैसला करेंगे, पार्टी फ़ैसला करेगी."
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में दूसरे पंक्ति के नेता ज़िम्मेदारी संभालने के लिए पूरी तैयार हैं.
हालाँकि वे इस सवाल का सीधा जवाब टाल गए कि सुदर्शन ने कहा है कि प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने (वाजपेयी ने) मंदिर निर्माण के लिए कोई काम नहीं किया.
उन्होंने इस सवाल के जवाब में इतना ही कहा, "यह उनकी अपनी राय है और हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है."
विश्व हिंदू परिषद
उधर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के गिरिराज किशोर ने वाजपेयी की प्रतिक्रिया का स्वागत करते हुए कहा है कि लालकृष्ण आडवाणी को अपना पद छोड़ देना चाहिए.
वीएचपी ने सुर्दशन का बयान आने के बाद ही उनकी सलाह का स्वागत किया था.
गिरिराज किशोर ने कहा है कि लालकृष्ण आडवाणी को पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़कर नए लोगों को प्रशिक्षण देने का काम करना चाहिए.