गुरुवार, 14 अप्रैल, 2005 को 15:27 GMT तक के समाचार
सुबीर भौमिक
बीबीसी के पूर्वोत्तर भारत संवाददाता
नमिता दास के दो बड़े-बड़े बच्चे हैं लेकिन अब भी वह पालतू बंदर को अपना दूध पिला कर पाल रही हैं.
भारत के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में रहने वाली अधेड़ उम्र की नमिता बुरु नाम के इस बंदर को अपना तीसरा बच्चा बताती हैं.
बंदर को दुलारते हुए वह कहती हैं, "जीहाँ, मैं उसे अपना दूध पिलाती हूँ. वह मेरा बेटा है".
चार साल पहले लकड़हारे का काम कर रहे उनके पति को बंदर का एक छोटा सा बच्चा पेड़ के नीचे पड़ा मिला.
ज़बरदस्त आँधी में वह नीचे गिर गया था और उसके माता-पिता की मौत हो गई थी.
नमिता ने उसे देखते ही छाती से लगा लिया और अपना दूध पिलाने लगीं.
उनकी बेटियाँ दीप्ति और तृप्ति बदंर को अपना भाई मानती हैं.
दीप्ति का कहना है, "हम रक्षा बंधन पर बुरू की कलाई पर राखी बाँधते हैं. वह हमारा भाई है."
नमिता और उनके पति की कमाई बस इतनी है कि वे किसी तरह अपना गुज़ारा चला सकें लेकिन इसके बावजूद वे बंदर पर पैसा ख़र्च करने से नहीं हिचकते.
अगर कोई उनके बंदर को पालतू जानवर कहे तो नमिता एकदम नाराज़ हो जाती हैं.
वह कहती हैं, वह जानवर नहीं है, मेरा बेटा है. मेरा कोई बेटा नहीं था और वह ईश्वर की देन है.
पाँच साल के बुरू को अभी तक अपना दूध पिलाने पर उनका कहना है, मैं उसे तब तक दूध पिलाऊँगी जब तक वह चाहेगा. मेरे लिए तो वह हमेशा ही नन्हा मुन्ना रहेगा.
नमिता के पड़ोसी इस तरह की हरकतों से काफ़ी नाराज़ हैं. वे इस तरह के बर्ताव को असामान्य बताते हैं.
बुरू आमतौर पर घर पर ही रहता है लेकिन कभी-कभी पड़ोसियों की छतों पर ऊधम मचाता है या उनके घरों में घुस कर केले चुरा लेता है.
पड़ोसी शिकायत करते हैं लेकिन नमिता बुरू को ज़ंजीर से बाँधने को तैयार नहीं हैं.
वह कहती हैं, लोग कुछ भी कहें लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि बुरू मेरा बेटा है.