बुधवार, 13 अप्रैल, 2005 को 09:34 GMT तक के समाचार
महाराष्ट्र सरकार के डांस बार बंद करने के फ़ैसले का बार मालिकों और बार गर्ल्स ने विरोध करने का फ़ैसला किया है.
बार मालिक जहाँ सरकार के इस फ़ैसले को अदालत में चुनौती देने की सोच रहे हैं, वहीं बार गर्ल्स ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग का दरवाज़ा खटखटाया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भारतीय बार गर्ल्स यूनियन के प्रतिनिधियों ने दोनों आयोगों को एक ज्ञापन सौंपा है.
इसमें कहा गया है कि सरकार के आदेश से 75 हज़ार बार गर्ल्स और तीन लाख से अधिक बार कर्मचारियों के आगे रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है.
लाइसेंस रद्द
महाराष्ट्र सरकार ने पहले मुंबई के बाहर के सभी डांस बार पर पाबंदी लगाई थी और अब मुंबई के सभी डांस बार के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं.
मुंबई में डांस बार चलाना अब गैर जमानती अपराध हो गया है और इसका उल्लंघन करनेवाले को तीन साल तक की सज़ा सुनाई जा सकती है.
राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य अनसुइया उइके और नफ़ीसा अली ने इस मामले की सुनवाई की.
पीटीआई को अनसुइया उइके ने बताया कि आयोग राज्य सरकार से कहेगा कि वह अपने फ़ैसले की वजह बताए.
दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि इन डांस बारों में लोग लड़कियों का नाच देखने आते हैं और लुकेछिपे तौर पर ये वेश्यावृत्ति के ठिकाने बन गए हैं.
सिर्फ़ मुंबई में ही पाँच सौ से अधिक डांस बार हैं जहाँ लगभग साठ हज़ार लड़कियाँ हिंदी फ़िल्मी गानों पर थिरकती है और लोग बियर की चुस्कियाँ लेते हैं.
लगभग छह महीने पहले मुंबई की पुलिस ने कई ऐसे बार पर छापे मारे थे जिसके विरोध में इनमें काम करने वाली लड़कियों ने जुलूस निकालकर नारेबाज़ी की थी.
महाराष्ट्र में लगभग 1250 बियर बार चल रहे हैं जिनमें से सात सौ मुंबई से बाहर हैं.