रविवार, 10 अप्रैल, 2005 को 20:48 GMT तक के समाचार
नगेंदर शर्मा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा शुरू करने के लिए भारत और पाकिस्तान दोनों की आलोचना की है.
वहीं जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने बस सेवा को भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी विश्वास मज़बूत करने के 'प्रयासों की जननी' बताया है.
बीबीसी के कार्यक्रम आप की बात बीबीसी के साथ में श्रोताओं के सवालों के उत्तर देते हुए उन्होंने पाकिस्तान की ये कहकर आलोचना की कि उसने कश्मीर को 'मुख्य मुद्दा' बनाए बिना बस सेवा शुरू करने का फ़ैसला किया.
साथ ही उन्होंने भारत पर ये आरोप लगाया कि वह कश्मीर की जटिल समस्या पर एक 'अवास्तविक रूख़' अपना रहा है.
गिलानी ने कहा,"पाकिस्तान को बस सेवा पर कोई फ़ैसला करने से पहले वैसा ही रूख़ रखना चाहिए था जैसा उसने परवेज़ मुशर्रफ़ की आगरा यात्रा के समय और उसके बाद आज़ाद कश्मीर की विधानसभा के दोनों सदनों को संबोधित करते समय रखा था".
आशंका
उन्होंने कहा,"दोनों देशों का कश्मीर मुद्दे को प्रमुख मुद्दा बनाए बिना बस सेवा शुरू करने के फ़ैसले से इस आशंका को बल मिलता है कि हो सकता है कि यथास्थिति को ही हल मान लिया जाए. हो सकता है कि नियंत्रण रेखा को ही विभाजन रेखा स्वीकार कर लिया जाए".
उन्होंने भारत के बारे में कहा,"भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह का ये बयान कि भारत सीमा को बदले बिना किसी भी मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है, ये स्पष्ट रूप से भारत के अवास्तविक रूख़ को दिखाता है और ऐसे में 57 साल पुरानी समस्या हल नहीं हो सकती".
ये पूछे जाने पर कि जब भारत और पाकिस्तान शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं तो उनकी आपत्ति क्या है गिलानी ने कहा,"भारत और पाकिस्तान एक साल से अधिक अर्से से बात कर रहे हैं मगर उससे क्या हुआ, क्या स्थिति एक इंच भी आगे खिसकी है?".
हुर्रियत नेता ने कहा कि जो लोग ये कह रहे हैं कि बस सेवा से लोगों में आपसी संपर्क बढ़ेगा उन्हें तथ्यों को देखना चाहिए.
गिलानी ने कहा,"कश्मीर मसले के बुनियादी सवालों को समझे बिना केवल बस चलाने और खेलने से हल नहीं निकलेगा. हमें भारत-पाकिस्तान की बातचीत पर कोई आपत्ति नहीं है मगर कश्मीरवासियों की समस्याओं का क्या होगा?".
उपलब्धि
वहीं जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने बस सेवा को भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी विश्वास मज़बूत करने के प्रयासों की जननी बताया.
उन्होंने कहा,"अगर जम्मू-कश्मीर के लोगों को पिछले 57 बरसों में कुछ मिला है तो वो ये बस सेवा है".
साथ ही जम्मू से विस्थापित पंडितों के प्रश्न पर कहा,"कश्मीरी पंडितों की वापसी पर हमारे पास निश्चित तौर पर एक योजना है मगर चूँकि ये एक नाज़ुक मसला है इसलिए हम इसे प्रचारित नहीं करना चाहते क्योंकि जब भी हम कुछ करना चाहते हैं तो स्वार्थी तत्व उसे नाकाम करने की कोशिश करते हैं".
उन्होंने कहा,"जब तक कश्मीर पंडित राज्य में लौटते नहीं तब तक हम ये नहीं कह सकते कि राज्य में स्थिति सामान्य हुई है".