बुधवार, 06 अप्रैल, 2005 को 06:48 GMT तक के समाचार
श्रीनगर से शकील अख़्तर
बीबीसी संवाददाता
राजा मोहम्मद खाँ श्रीनगर में और बेटे पोतों के साथ रहते हैं.
लेकिन वे कहते हैं, “मैं यहाँ हूँ, मैं वहाँ रहा हूँ, आता जाता रहा हूँ”
वहाँ कहने से उनका सीधा मतलब नियंत्रण रेखा के पार वाले कश्मीर से है.
96 साल के राजा मोहम्मद खाँ के पास भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों के पासपोर्ट हैं और मुक़दमा जीतने के बाद श्रीनगर में रह रहे हैं.
बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पुरखे मुज़फ़्फ़राबाद तहसील के अंबोर गाँव के रहने वाले हैं.
वे बताते हैं कि मुज़फ़्फ़राबाद में पहले एक ही मिडिल स्कूल हुआ करता था और वे छठवीं कक्षा पास करने के बाद श्रीनगर आ गए थे.
यहाँ आकर उन्होंने मेट्रिक पास की और दो साल कॉलेज भी गए फिर नौकरी कर ली.
दो पासपोर्ट
1947 में जब विभाजन हुआ तब वे नौकरी के चक्कर में यहीं रह गए.
तब से वे यहीं थे. वे 1984 में पाकिस्तान से वीज़ा लेकर पहली बार मुज़फ़्फ़राबाद गए और फिर 2001 तक वहीं रह गए.
उनके भाई और पूरा कुनबा अभी भी यहीं है और वे गए तो थे उनसे मिलने लेकिन पता चला कि उनके जायजाद पर कब्ज़ा हो गया है तो वे वहीँ मुक़दमा लड़ने लगे.
इस बीच बेटी और बेटे की शादी भी वहाँ कर दी.
जब वे श्रीनगर वापस आए तो पाकिस्तान के पासपोर्ट पर भारत से वीज़ा लेकर आए. इस गड्डमड्ड को के बारे में वे कहते हैं, “मेरे पास तो दोनों मुल्कों को पासपोर्ट है, यहाँ वाला वहाँ दिया और वहाँ वाला यहाँ”
यह पूछने पर कि क्या उन्हें अधिकारियों ने उन्हें परेशान नहीं किया, वे कहते हैं कि ख़ूब किया लेकिन वे मुक़दमा लड़कर यहाँ रहने का केस जीत गए.
बस
इस सवाल पर कि वे कहाँ के वासी हैं, उनका जवाब सीधा है मैं जम्मू-कश्मीर का नागरिक हूँ.
राजा मोहम्मद खाँ श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा को अच्छा संकेत मानते हैं और कहते हैं कि लोगों को मिलने ही देना चाहिए.
इस बस यात्रा की मुख़ालफ़त करने वालों के बारे में वे कहते हैं, “जो लोग बस का विरोध कर रहे हैं वे वही हैं जिनको बस शुरु होने से नुक़सान होने वाला है.”
वे अभी भी मुज़फ़्फ़राबाद जाना चाहते हैं लेकिन जैसा उन्होंने ख़ुद बताया कि अब स्वास्थ्य इतना साथ नहीं देता.
वे मानते हैं कि बस सेवा शुरु होने से नियंत्रण रेखा ही अंतरराष्ट्रीय सीमा में बदल जाएगी वे लोग ग़लतफ़हमी में हैं.