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मंगलवार, 05 अप्रैल, 2005 को 11:28 GMT तक के समाचार

उड़ी से लौटकर विनोद वर्मा
बीबीसी संवाददाता

कश्मीर की दुकानों की हरियाली का रहस्य

श्रीनगर से नियंत्रण रेखा की ओर जाते हुए पटन और फिर उड़ी में सड़क किनारे की दुकानें देखकर एकबारगी पता चलता है कि पूरा बाज़ार हरे रंग में रंग दिया गया है.

अभी कुछ दिनों पहले सुरक्षाकर्मी लोगों को इसी रंग से पहचाना करते थे.

हरा रंग यानी पाकिस्तान का रंग और इसका सीधा मतलब होता था भारत की मुख़ालफ़त और इसके परिणाम कुछ भी हो सकते थे.

लेकिन अब हवा का रुख़ बदल गया है, अब दोस्ती का समय आ गया है.

इसलिए सेना के अफ़सर ख़ुद लोगों को पेंट बाँट रहे हैं और हिदायतें दे रहे हैं कि वे अपने घरों को हरे रंग में रंग लें.

सलामाबाद में बीबीसी से बात करते हुए दुकानदारों ने पहले तो इधर-उधर की बातें कीं. मसलन एक दुकानदार जावेद मज़ीद ने कहा, “हम उन लोगों को बताना चाहते हैं कि हम भी उनके जैसे हैं और हमने अपनी ख़ुशी से ये रंग लगाए हैं.”

लेकिन बातचीत आगे बढ़ती है तो वे बताते हैं कि उन्होंने भी अपनी दूकान में सेना का दिया हुआ रंग लगवाया है.

कल्पनाशीलता

फिर तो कई दुकानदारों ने बताया किया कि एक हफ़्ते पहले ही सेना ने अपनी ओर से ये रंग उन्हें दिए हैं.

यह पूछने पर कि उन्होंने इंकार क्यों नहीं किया, एक दुकानदार, क़दीर अहमद कहते हैं, “सीओ साहब (यानी कमांडिंग अफ़सर) ने कहा तो हमने लगा लिया.”

क़दीर अफ़सर का नाम नहीं जानते और उनके लिए इतना काफ़ी है कि वे अफ़सर हैं और वे भी सेना के.

गश्त लगाते सिपाहियों ने भी इस बात की पुष्टि की कि अफ़सरों ने ये रंग बँटवाए हैं हालांकि वे इसका कारण नहीं बता पाते या नहीं बताते.

लोग कुछ कहते नहीं लेकिन यहाँ लोग आमतौर पर सेना और दूसरे सुरक्षाबलों की बात मानने के ऐसे आदी हो गए हैं कि वे इससे इंकार भी नहीं कर पाते.

उड़ी सेक्टर में ठेकेदारी का काम करने वाले इरशाद अहमद शाह कहते हैं, “थोड़े दिन पहले जब हालात ख़राब थे तो किसी के घर पर हरा रुमाल भी दिख जाता था तो इनको शक होता था और पकड़ के ले जाते थे.”

वे कहते हैं कि उन्हें भी कुछ समझ नहीं आ रहा है.

हालांकि इस हरे रंग के लिए लोगों के पास अपने तर्क भी हैं. जैसे कि उड़ी के व्यापारी राजीव कहते हैं कि हरा रंग तो जम्मू कश्मीर की हरियाली का प्रतीक है.

इस हरे रंग से मुज़फ़्फ़राबाद से आने वाले लोग किस प्रतीक के रुप में लेंगे यह तो पता नहीं लेकिन सेना ने अपनी पूरी कल्पनाशीलता दिखाई है.

सेना हरे रंग को लेकर पहले भी कल्पनाशील थी और अब भी कल्पनाशील है. बस उसका अंदाज़ बदल गया है.