सोमवार, 28 मार्च, 2005 को 07:30 GMT तक के समाचार
हत्या के एक मामले में महीनों जेल में रहने के बाद ज़मानत पर छूटे शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने काँची कामकोटि जाकर पूजा अर्चना की है.
पिछले नवंबर में हुई गिरफ़्तारी के बाद से वे पहली बार मठ गए हैं.
जयेंद्र सरस्वती के बाद जूनियर शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती को भी गिरफ़्तार कर लिया गया था और इसके बाद कांचिकाम कोटि में कोई शंकराचार्य मौजूद नहीं थे.
मठ के पूर्व कर्मचारी शंकर रमण की हत्या के आरोप में शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को गिरफ़्तार किया गया था.
इसके बाद उन पर दो और आरोप लगाए गए थे.
उनकी गिरफ़्तारी के बाद राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया था और भारतीय जनता पार्टी ने इस पर विरोध प्रदर्शन भी किया था.
कांची पीठ की ओर से बताया गया था कि शंकराचार्य कांची से 40 किलोमीटर दूर कालावाई मठ में रह रहे थे.
उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने हत्या के मामले की जाँच पूरी होने तक शंकराचार्य के कांची मठ में प्रवेश पर रोक लगा दी थी.
बाद में विशेष जाँच दल ने आरोप पत्र पेश कर दिया था इसके बाद से शंकराचार्य के मठ में प्रवेश का रास्ता खुल गया था.
हालांकि अभी तक अभियुक्तों को आरोप पत्र की प्रति नहीं मिली है.