रविवार, 27 मार्च, 2005 को 12:51 GMT तक के समाचार
भारत और चीन जैसे दो बड़े शक्तिशाली पड़ोसी देशों और हिमालय की गोद में बसा है छोटा सा देश भूटान.
सदियों तक पूरी दुनिया से कटा रहा यह देश अब धीरे धीरे खुद को मुख्य धारा में ला रहा है लेकिन अभी भी इस देश में प्राचीन परंपराओं को बचाए रखने की पुरज़ोर कोशिश हो रही है.
भूटानी भाषा में भूटान का नाम है द्रूक यूल यानी कड़कती हुई बिजली और ड्रैगनों का देश.
1907 में यहां वांगचुक राजवंश का शासन शुरु हुआ जो अब तक चला आ रहा है जो नए लोकतांत्रिक संविधान के लागू होने के बाद ख़त्म हो सकता है.
1970 के दशक में बाहर के लोगों को भूटान आने की अनुमति दी गई.पहला विदेशी पर्यटक इस देश में आया 1974 में .
प्राकृतिक रुप से बेहद सुंदर इस देश में अभी पर्यटन पर कई प्रतिबंध है और यात्रा के लिए ख़ासकर पश्चिमी देशों के नागरिकों को सरकार से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है.
परंपरा पर ज़ोर
राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक देश की बौद्ध संस्कृति के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं और इसे बचाए रखने की पूरी कोशिश होती है. पुरुषों के लिए घुटनों तक पहना जाने वाला राष्ट्रीय वस्त्र धारण करना अनिवार्य है और महिलाओं को एड़ियों तक की लंबाई वाला कीरा पहनना आवश्यक है.
1990 में भूटान में रह रहे नेपाली समुदाय ने विद्रोह किया जिसके बाद हिंसक घटनाएँ हुई.
क़रीब 20 लाख की आबादी वाले इस देश की भाषा है ज़ोगखा.
वर्तमान राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक ने 1972 में सत्ता संभाली और वो उस समय केवल 17 साल के थे. ब्रिटेन में पढ़े और विदेशों में घूम चुके जिग्मे सिंग्ये ने सीमित आधुनिकीकरण की नीति अपनाई.
उन्होंने ही पहली बार 1998 में राजा की शक्तियों को कम करने की शुरुआत की . लोकतांत्रिक संविधान बनाने की सोच भी इसी राजा की थी.
भूटान में 1999 में पहली बार टेलीविज़न आया. इस डर से पहले टेलीविज़न नहीं लाया गया था कि इससे स्थानीय संस्कृति पर असर पड़ेगा.
रेडियो प्रसारण 1973 में शुरु हुआ और पहला इंटरनेट कैफे 2000 में खुला.