मंगलवार, 22 मार्च, 2005 को 12:54 GMT तक के समाचार
नेपाल में एक शक्तिशाली भ्रष्टाचार निरोधी आयोग ने छह पूर्व मंत्रियों से सरकारी ख़र्चों के कथित दुरूपयोग के बारे में पूछताछ की है.
नेपाल में नरेश ज्ञानेंद्र के सत्ता हाथ में लेने के बाद से पहली बार वहाँ बड़े अधिकारियों की सुनवाई हो रही है.
भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए नरेश ने पिछले महीने एक शाही आयोग गठित किया था.
इस आयोग को काफ़ी व्यापक अधिकार दिए गए हैं और वह न्यायालय के ही समान है.
इस बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने राजनीतिक संकट के समधान के लिए नरेश से सीधी बातचीत का प्रस्ताव रखा है.
आरोप औऱ खंडन
मंगलवार को दो और इससे पहले सोमवार को चार नेताओं से पूछताछ की गई थी.
जिन नेताओं से पूछताछ की गई उनके नाम हैं - जोग मेहर श्रेष्ठ, युबराज ग्यवली, पूर्ण बहादुर खड़का, मोहम्मद मोहसिन, होमनाथ दहल और बद्री प्रसाद मंडल.
ये सभी नेता नेपाल में शेर बहादुर देउबा की गठबंधन सरकार में मंत्री थे.
समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने ख़बर दी है कि इन मंत्रियों पर ये आरोप हैं कि उन्होंने 50,000 डॉलर से भी अधिक की राशि अपने समर्थकों में बाँट दी.
इस पूरी सुनवाई का ब्यौरा अभी नहीं मिल सका है मगर पूछताछ के लिए बुलाए जानेवाले एक पूर्व मंत्री होमनाथ दहल ने कहा है वह अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.
एसोसिएटेड प्रेस ने उनको ये कहते हुए बताया है कि आरोप दुर्भावनापूर्ण हैं.
मंत्री का कहना है,"आरोप राजनीतिक लाभ के लिए लगाए गए हैं और इनका उद्देश्य विरोध प्रदर्शनों को हतोत्साहित करना और राजनेताओं को डराना है."
प्रस्ताव
इस बीच एक अन्य घटनाक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने राजनीतिक संकट के समधान के लिए नरेश से सीधी बातचीत का प्रस्ताव रखा है.
उन्होंने बीबीसी के साथ एक विशेष बातचीत में ये भी कहा कि देश में सभी राजनीतिक दलों को मिलाकर एक सर्वदलीय सरकार बनाई जानी चाहिए.
नेपाल नरेश ने देउबार सरकार को बर्ख़ास्त करने के बाद ही सत्ता हाथ में ली थी.
देउबा को तब हिरासत में ले लिया गया था और एक सप्ताह पहले उनको रिहा किया गया.