सोमवार, 14 मार्च, 2005 को 20:00 GMT तक के समाचार
भारत में मुस्लिमों की एक संस्था ने ताजमहल पर अपना दावा किया है.
सुन्नी वक्फ़ बोर्ड का कहना है कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों की सारी कब्रगाहों का नियंत्रण उनके हाथ में है और इसी नाते ताजमहल पर भी उन्हीं का हक होना चाहिए.
बोर्ड का कहना है कि ताजमहल में कई कब्रें हैं जिसमें मुगल शासक शाहजहां और मुमताज़ महल की कब्र भी शामिल है.
हर साल दुनिया भर से लाखों पर्यकर मोहब्बत की इस यादगार को देखने आते हैं.
17 वीं शताब्दी में शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज़ महल की याद में ताजमहल बनवाया था.
इसके बाद से यह इमारत सभी प्रेमियों के लिए किसी पवित्र स्थल से कम का दर्ज़ा नहीं रखती.
समयसीमा
भारत सरकार ने ही उत्तर प्रदेश के सभी कब्रगाहों का मालिकाना हक सुन्नी वक्फ़ बोर्ड को दिया है.
अब इसी अधिकार के तहत बोर्ड ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और केंद्र सरकार को नोटिस भेज दिए हैं और मार्च के अंत तक जवाब मांगा है.
बीबीसी से बातचीत में बोर्ड के चेयमैन हाफिज़ उस्मान ने कहा कि शाहजहां और मुमताज़ महल की कब्रों के अलावा ताजमहल के अहाते में कई और कब्रें भी हैं.
उस्मान का कहना है कि इमारत में मस्ज़िद और कब्र का एक साथ होना निश्चित करता है कि यह बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आता है.
विवाद
बोर्ड का कहना है कि एक बार मालिकाना हक को लेकर जारी विवाद का निपटारा हो जाए तो वह टिकटों की बिक्री से होने वाली आय का सात प्रतिशत हिस्सा भी लेगा.
इतना ही नहीं बोर्ड ने ताजमहल में पर्यटकों के आने से होने वाली आमदनी का आडिट कराने के अधिकार भी मांगे हैं.
उस्मान का कहना था कि बोर्ड ने पहले ताजमहल पर अधिकार की बात नहीं कि क्योंकि वह नहीं चाहता था कि इसे लेकर विवाद खड़ा हो.
लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि 350 साल पुरानी मोहब्बत की इस धरोहर को लेकर एक और विवाद खड़ा हो सकता है.