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सोमवार, 14 मार्च, 2005 को 07:01 GMT तक के समाचार

झारखंड मामले में अब दखल देने से इंकार

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि झारखंड में हुए राजनीतिक बदलाव के बाद अब वह इस मामले दखल नहीं देना चाहता.

शिबू सोरेन को सरकार बनाने के लिए बुलाने के राज्यपाल के फ़ैसले को चुनौती देने वाली अर्जुन मुंडा की एक याचिका पर सोमवार को झारखंड के मामले पर सुनवाई थी.

वहाँ यूपीए की ओर से मुख्यमंत्री बनाए गए शिबू सोरेन से इस्तीफ़ा मांगकर एनडीए के अर्जुन मुंडा को सरकार बनाने के लिए कहा गया है.

अर्जुन मुंडा 15 मार्च को बहुमत साबित करने वाले हैं.

इस बीच एनसीपी ने अपने इकलौते विधायक के लिए अर्जुन मुंडा के ख़िलाफ़ वोट करने के लिए व्हिप जारी कर दिया है.

इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने शिबू सोरेन सरकार को निर्धारित तारीख़ से पहले ही बहुमत साबित करने के आदेश दिए थे.

साथ ही न्यायालय ने कहा था कि जिस दिन बहुमत साबित करें उस दिन की विधानसभा की कार्यवाही की रिकॉर्डिग पेश की जाए.

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले पर राजनीतिक दलों ने शोर मचाया था और न्यायपालिका तथा विधायिका के अधिकार क्षेत्रों को लेकर एक बार फिर बहस चल पड़ी थी.

लेकिन इस बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शिबू सोरेन सरकार से इस्तीफ़ा देने को कहा और राज्यपाल ने एनडीए के अर्जुन मुंडा को सरकार बनाने का निमंत्रण देकर शपथ दिलवाई.

राजनीतिक उठापटक

27 फ़रवरी को राज्य के चुनाव परिणाम आने के बाद से ही झारखंड में राजनीतिक उठापटक चल रही है और झारखंड के राजनीतिक घटनाक्रम ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बहस खड़ा कर दिया है.

झारखंड में विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं और बहुमत के लिए कम से कम 41 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता है.

एनडीए ने फ़रवरी में हुए चुनाव में कुल 36 सीटें हासिल की हैं और फिर पाँच निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा किया.

लेकिन राज्यपाल ने शिबू सोरेन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया इसके बाद से विवाद शुरु हुआ.

मगर झारखंड में अभी तक जो राजनीतिक दाँव-पेंच नज़र आए हैं उसमें लेकिन विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले तक विधायकों की जोड़-तोड़, छीना-झपटी का ड्रामा जारी रहेगा.

इस बीच एनसीपी के इकलौते विधायक कमलेश कुमार सिंह के लिए पार्टी ने व्हिप जारी कर दिया है.

पार्टी व्हिप के अनुसार उन्हें मुंडा सरकार के ख़िलाफ़ वोट देना होगा.

कमलेश कुमार सिंह ने शिबू सोरेन सरकार में मंत्री के रुप में शपथ ली थी और बाद में अर्जुन मुंडा सरकार के मंत्री के रुप में भी शनिवार को शपथ ले ली.

ज़ाहिर है, एक विधायक के भी इधर से उधर होने पर सरकार के भविष्य ख़तरे में पड़ सकता है.