नगेंदर शर्मा
बीबीसी हिंदी संवाददाता
भारत के क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा है कि झारखंड मुद्दे पर केंद्र सरकार के पास दो विकल्प थे- या तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानें या उसकी अनदेखी करें.
लेकिन केंद्र सरकार ने क़ानून के शासन को क़ायम रखने के लिए उसके निर्देश को मानने का फ़ैसला किया.
बीबीसी हिंदी के साप्ताहिक कार्यक्रम आपकी बात बीबीसी के साथ में हिस्सा लेते हुए क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा, "केंद्र सरकार के पास सिर्फ़ दो विकल्प थे और केंद्र सरकार ने ख़ुद से यह निर्णय किया कि चूँकि सोरेन ने सही समय पर बहुमत साबित नहीं किया इसलिए उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए."
भारद्वाज ने कहा कि सरकार को यह लग रहा था कि शिबू सोरेन को बहुमत नहीं था और इस मामले को और खींचने की ज़रूरत नहीं थी और इसलिए राज्यपाल को इस स्थिति के मद्देनज़र फ़ैसला करने को कहा गया.
उन्होंने कहा कि यह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(यूपीए) सरकार का और न राज्यपाल या विधायिका का अपमान था. क़ानून मंत्री ने कहा कि यह केंद्र सरकार का निर्णय था और बिना किसी दबाव के था.
प्रक्रिया
यह पूछे जाने पर कि अगर यह सरकार का अपना फ़ैसला था, तो फ़ैसले में देरी क्यों हुई, तो क़ानून मंत्री ने कहा, "इसमें एक संवैधानिक प्रक्रिया होती है. जब राज्यपाल अपना काम कर रहे होते हैं तो केंद्र सरकार उसमें कूद नहीं सकती. यह देखना राज्यपाल का काम है कि कहीं कोई मुश्किल तो नहीं."
उन्होंने कहा कि एक पार्टी ने जब पहले राष्ट्रपति और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. इसलिए केंद्र सरकार ने सही समय पर क़दम उठाया.
क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा कि सरकार ने संविधान की भावना के तहत क़दम उठाया और इसे लागू किया.
यूपीए सरकार की मंशा और राज्यपालों के कामकाज के तरीक़ों पर उठ रहे सवालों के बारे में क़ानून मंत्री ने कहा, "यूपीए सरकार ने ही गोवा में अपनी ही सरकार को बर्ख़ास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफ़ारिश की और झारखंड में शिबू सोरेन से इस्तीफ़ा मांगा."
उन्होंने कहा कि अगर केंद्र में किसी दूसरी पार्टी की सरकार होती या उनका राज्यपाल होता तो उनका रुख़ दूसरा ही होता.
अस्पष्ट जनमत
झारखंड में राज्यपाल की भूमिका पर क़ानून मंत्री ने कहा कि जनमत इतना अस्पष्ट था कि राज्यपाल को अपने विवेक से स्थिति का आकलन करना पड़ा.
उन्होंने कहा कि राज्यपाल के फ़ैसले पर लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है लेकिन ऐसा पहले भी हुआ है.
क़ानून मंत्री ने कहा कि एक घटना से ही किसी सरकार की छवि पर उंगली नहीं उठाई जा सकती. उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार का आकलन पिछले नौ महीने में उसके कामकाज से करना चाहिए.
क़ानून मंत्री ने कहा कि यह याद रखने वाली बात है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में ही बिहार, गोवा या झारखंड में क़ानून के शासन का उल्लंघन नहीं हुआ.
सांप्रदायिक हिंसा पर क़ानून के बारे में हंसराज भारद्वाज ने कहा कि इस पर विधेयक तैयार हो रहा है और क़ानून मंत्रालय इस मामले में गृह मंत्रालय की मदद कर रहा है.