शुक्रवार, 11 मार्च, 2005 को 15:54 GMT तक के समाचार
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को रिहा कर दिया गया है.
रिहाई के बाद बीबीसी से एक विशेष बातचीत में उन्होंने राजतंत्र की स्थापना को नेपाल के संविधान का घोर उल्लंघन बताया और कहा कि वे लोकतंत्र की बहाली के लिए अभियान जारी रखेंगे.
उन्होंने माँग की है कि नज़रबंद किए गए सभी नेताओं को रिहा किया जाए और सत्ता निर्वाचित सरकार के हाथ में सौंप दी जाए.
लगभग महीने भर पहले नेपाल नरेश ने उनकी सरकार को बर्ख़ास्त कर उनको नज़रबंद कर दिया था.
देउबा को ऐसे समय रिहा किया गया है जब नेपाल की प्रमुख विपक्षी पार्टियाँ ने अगले सप्ताह से नेपाल में आपातकाल के विरोध में प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू करने की घोषणा
की है.
नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने एक फ़रवरी को देउबा सरकार को बर्ख़ास्त कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी.
पुलिस ने कहा है कि शुक्रवार को देउबा के अलावा कई और नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को भी रिहा किया गया है जिनमें पूर्व गृहमंत्री पूर्ण बहादुर खडका का नाम भी शामिल है.
मगर नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला तथा कई दूसरे बड़े नेता अभी तक या तो नज़रबंद हैं या हिरासत में हैं.
हालाँकि नेपाली नेताओं को रिहा क्यों किया गया ये नहीं बताया गया है.
लेकिन नेपाल नरेश पर नेताओं को रिहा करने के लिए देश में भी दबाव था और विदेशों से भी.
प्रदर्शन
नेपाली कांग्रेस के सदस्यों ने कहा है कि अगले सप्ताह से वे पूरे देश में सरकारी दफ़्तरों के बाहर धरना देंगे चाहे उन्हें गिरफ़्तार ही क्यों ना होना पड़े.
नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री राम शरण महत ने कहा है कि ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण और अहिंसक होंगे.
उन्होंने उम्मीद जताई कि पाँच पार्टियों के उनके गठबंधन के अन्य घटक भी विरोध में शामिल रहेंगे.
लेकिन उन्होंने माओवादी विद्रोहियों के साथ किसी तरह का समझौता करने से इनकार किया.
साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने अपने नेताओं को निर्देश दिया है कि वे गिरफ़्तारी से बचने के लिए भूमिगत होने या किसी दूसरे देश में जाने की कोशिश ना करें.
नेपाल में आपातकाल लगने के बाद से वहाँ के कई नेता और कार्यकर्ता या तो भूमिगत हो गए हैं या भारत भाग गए हैं.