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शनिवार, 05 मार्च, 2005 को 13:24 GMT तक के समाचार

सोरेन के पास 15 मार्च तक का वक़्त

झारखंड में नवनिर्वाचित विधानसभा का सत्र 10 से 15 मार्च को बुलाया जा रहा है.

अपनी नियुक्ति के कारण चर्चित रही शिबू सोरेन सरकार इसी सत्र में अपना बहुमत साबित करेगी.

विधानसभा सत्र की तारीख़ें तय करने के लिए राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी द्वारा बुलाई गई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया.

हालांकि इस बैठक का भारतीय जनता पार्टी और सहयोगी दलों ने यह कहकर विरोध किया कि वे इस सरकार को मानते ही नहीं.

दिल्ली में भाजपा ने छह दिनों का सत्र बुलाने के फ़ैसले का विरोध करते हुए कहा है कि बहुमत साबित करने के लिए तीन दिनों का सत्र भी पर्याप्त था.

राज्यपाल सिब्ते रज़ी ने जिस तरह से शिबू सोरेन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया उसे लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है और इसी विवाद के कारण राष्ट्रपति ने राज्यपाल को दिल्ली तलब किया था.

शुक्रवार को राष्ट्रपति अब्दुल कलाम से मुलाक़ात के बाद घोषणा की थी कि नवनियुक्त मुख्यमंत्री को तय तिथि से पहले ही बहुमत साबित करना होगा.

उन्होंने कहा कि पहले जो तारीख़ बहुमत साबित करने के लिए तय की गई थी उसे बदलकर समय पूर्व की कोई तारीख़ तय की जाएगी.

ग़ौरतलब है कि शिबू सोरेन को जब इसी सप्ताह मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी तो उन्हें विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 21 मार्च तक का समय दिया गया था.

विधानसभा का सत्र

राज्यपाल के साथ बैठक में जो तारीखें तय की गई हैं उसके अनुसार 10 मार्च को विधानसभा का सत्र शुरु होगा.

सत्र की तारीख़ों की पुष्टि शनिवार की शाम हो रही मंत्रिमंडल की बैठक में की जाएगी.

सत्र शुरु होने के साथ ही एक कार्यकारी विधानसभा अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाएगा.

सत्र में दो दिनों के शपथ के अलावा राज्यपाल का अभिभाषण होगा और फिर सरकार के विश्वास मत पर बहस के बाद मतदान होगा.

माना जा रहा है कि बहुमत पर मतदान आख़िरी दिन यानी 15 मार्च को ही हो सकेगा.

इस बीच सरकार सदन में मनोनीत होने वाले एंग्लोइंडियन सदस्य को विधानसभा सत्र से पहले ही मनोनीत करने की तैयारी की जा रही है.

भाजपा का विरोध

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी नेता राजनाथ सिंह ने 10 से 15 मार्च तक छह दिनों का विधानसभा का सत्र बुलाने के फ़ैसले का विरोध किया है.

उनका कहना था कि यह कार्य तीन दिनों के सत्र में भी पूरा हो सकता था और छह दिनों का समय यूपीए सरकार को समय देने के लिए किया गया है.

उन्होंने कहा कि इससे विधायकों की ख़रीद फ़रोख़्त को बढ़ावा मिलेगा.

हालांकि वे इस सवाल का जवाब टाल गए कि बिहार में नीतीश कुमार को बहुमत साबित करने के लिए सात दिनों का और केंद्र में पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी को बहुमत साबित करने के लिए भी 13 दिनों का समय दिया गया था.

भाजपा नेता ने राज्यपाल को बर्खास्त करने की अपनी मांग दोहराई है और कहा है कि वे कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के निर्देशों पर काम कर रहे हैं.