शुक्रवार, 04 मार्च, 2005 को 12:03 GMT तक के समाचार
हरियाणा में मुख्यमंत्री पद के लिए पाँच दिन लगातार चली खींचतान के बाद आख़िर बाज़ी भूपिंदर सिंह हुड्डा के हाथ लगी है.
दिल्ली में पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हरियाणा विधायक दल की एक बैठक के बाद यह घोषणा की गई है.
मुख्यमंत्री पद के एक और दावेदार और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल इस फ़ैसले के विरोध में अपने समर्थक 20 विधायकों के साथ बैठक में नहीं गए थे.
बैठक के बाद हरियाणा के प्रभारी महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने बताया कि 47 विधायक थे जिन्होंने सर्वसम्मति से हुड्डा को अपना नेता चुना.
भजनलाल की अनुपस्थिति के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा "सबकी अपनी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ होती हैं और इसके दबाव में शायद उन्होंने ऐसा किया हो."
इससे पहले पार्टी की ओर से पर्यवेक्षकों पीएम सईद और अशोक गहलोत ने विधायकों से अलग-अलग बात की थी और अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को सौंप दी थी.
सुबह भजनलाल को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुलाकर बात की थी लेकिन उन्हें मनाने की नाकाम कोशिश की थी.
हरियाणा में चुनाव के नतीजे आने के समय से ही मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार थे. इनमें भजनलाल के अलावा चौधरी बीरेंद्र सिंह, रणदीप सिंह सुरजेवाला, कुमारी शैलजा, भूपिंदर सिंह हुड्डा और उद्योगपति ओपी जिंदल का भी नाम था.
भूपिंदर सिंह हुड्डा पहले हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं और इस समय रोहतक से सांसद हैं.