बुधवार, 02 मार्च, 2005 को 20:03 GMT तक के समाचार
दुनिया के सबसे मोटे चूहे भारत में पाले जा रहे हैं और शायद इनकी जांच से मोटापा बढ़ाने वाले जीन का पता चल सकता है.
भारत की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन के वैज्ञानिकों ने 500 मोटे चूहे पाल रखे हैं और उन पर परीक्षण किए जा रहे हैं.
इंस्टीट्यूट में पाले जा रहे इन चूहों का वज़न 900 ग्राम से एक किलो तक है.
सबसे मोटे चूहे का वज़न 1 किलो चार ग्राम है जो कि सामान्य चूहों के वज़न से चार गुना अधिक है.
इन चूहों को अंतरराष्ट्रीय शोध मानकों के अनुसार प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसायुक्त भोजन कराया जाता है.
यानी कि इन चूहों को भोजन में मुख्य रुप से गेहूं, भुना हुआ चना और दूध दिया जाता है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि इन चूहों में एक विशेष किस्म का जीन है जिसके कारण ये आम तौर सामान्य चूहों से चार गुना अधिक खाना खाते हैं.
चूहों पर वैज्ञानिक लगातार परीक्षण करते रहे हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार जैसे ही ये चूहे मोटे होते हैं तो इनमें बीमारियां बढ़ती जाती हैं.
लेप्टीन जीन
इन मोटे चूहों में से अधिकतर स्तनों के कैंसर से पीड़ित हैं और कई चूहों में किडनी से जुड़ी बीमारियां भी पाई गई हैं. इनमें से कोई भी चुहिया प्रजनन नहीं कर सकती.
आम तौर पर चूहों की उम्र तीन साल की होती है लेकिन ये मोटे चूहे या फिर कहें कि " सूमो चूहे " 18 महीने से अधिक नहीं जीते हैं.
इंस्टीट्यूट के एक वैज्ञानिक नप्पन वेथ्थिल गिरिधरन कहते हैं "हम ये कह सकते हैं कि मोटापे के कारण इनकी उम्र काफी कम होती है. हम उस जीन की तलाश में हैं जो इन चूहों में मोटापा बढ़ा रहा है."
भारत और अमरीका में वैज्ञानिक इन मोटे चूहों में पाए जाने वाले इस जीन की तलाश में पांच लाख डालर लागत की एक परियोजना पर काम शुरु करने वाले हैं.
दुनिया में मोटापे से जुड़े एक जीन की खोज 1994 में अमरीकी वैज्ञानिकों ने की थी.
न्यूयार्क की रॉकफेलर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने जेफरी फ्रीडमैन के नेतृत्व में लेप्टीन प्रोटीन नामक इस जीन की खोज की थी.
लेप्टीन प्रोटीन वसा कोशिकाओं से निकलने वाला एक हार्मोन है. डा फ्रीडमैन का कहना है कि अगर मोटे चूहों पर लेप्टीन प्रोटीनयुक्त इंजेक्शन लगाया जाता है तो उनका वज़न 30 प्रतिशत कम होता है.
हालांकि भारत के सूमो चूहों पर लेप्टीन प्रोटीन का कोई असर नहीं पड़ा है यानी कोई और जीन भी है जो मोटापे के लिए ज़िम्मेदार है.