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बुधवार, 02 मार्च, 2005 को 07:57 GMT तक के समाचार

नेपाल में बड़ा तलाशी अभियान

नेपाल में अधिकारियों ने कहा है कि देश के पश्चिमी हिस्से में माओवादी विद्रोहियों को पकड़ने के लिए बुधवार को एक बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया गया है.

ध्यान रहे कि ये संघर्ष सोमवार शाम को राजधानी काठमांडू से दक्षिण-पश्चिम में बरदिया ज़िले में हुआ.

नेपाली सेना ने इस लड़ाई में कम-से-कम 46 विद्रोहियों और चार सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का दावा किया था.

सरकार ने पत्रकारों को भी आदेश दिया है कि वे ऐसी कोई ख़बरें नहीं छापें जिनसे विद्रोहियों को किसी तरह का प्रोत्साहन मिले.

सूचना मंत्री तांका ढकाल ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "यह क़दम मीडिया पर सेंसरशिप नहीं है. आतंकवाद पर तभी क़ाबू पाया जा सकता है जब मीडिया अपने कर्तव्यों और उत्तरदायित्वों को ज़िम्मेदार तरीक़े से निभाए."

काठमांडू स्थित बीबीसी संवाददाता के अनुसार पिछले कुछ सप्ताहों में नेपाल में छिड़ा ये सबसे बड़ा संघर्ष था.

संवाददाता का ये भी कहना है कि नेपाल में राजा ज्ञानेंद्र के सत्ता हाथ में लेने के बावजूद लगातार संघर्ष हो रहे हैं.

नेपाल नरेश ने एक महीने पहले देश में आपातकाल लागू कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी और ये कहा था कि इससे लंबे समय से जारी माओवादी हिंसा को रोका जा सकेगा.

सैनिक अधिकारियों ने कहा है कि नेपाल के पश्चिमी क़स्बे नेपालगंज में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि सोमवार की मुठभेड़ के बाद हो सकता है कुछ विद्रोही आसपास के इलाक़ों में जाकर छुप गए हों.

इसके अलावा सोमवार को हुई मुठभेड़ के स्थान बरदिया ज़िले में भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.

बरदिया ज़िले को माओवादी विद्रोहियों का गढ़ माना जाता है. यह इलाक़ा जंगलों से घिरा हुआ है.

स्थानीय लोगों ने बीबीसी को बताया कि सोमवार को मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब सुरक्षा बल एक सड़क पर लगाई गई बाधाओं को हटा रहे थे, तभी उन पर विद्रोहियों ने घात लगाकर हमला किया.

संवाददाताओं का कहना है कि भारी संख्या में विद्रोहियों की मौत के बाद बहुत से विद्रोही आसपास के जंगलों में भाग गए लगते हैं.

सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि विद्रोही अपने बहुत से घायल और मृतक साथियों को भी अपने साथ ले गए. अधिकारियों का कहना है कि इस संघर्ष में मारे गए विद्रोहियों की संख्या एक सौ से ज़्यादा हो सकती है.

विद्रोहियों की तरफ़ से अभी इस संघर्ष के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.