सोमवार, 21 फ़रवरी, 2005 को 16:52 GMT तक के समाचार
अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता
भारत प्रशासित कश्मीर में आए बर्फ़ीले तूफ़ान से पिछले दो दिनों में 100 से अधिक लोग मारे गए हैं.
आनंतनाग के कुंड क्षेत्र में विल्टेनगर नाम का गाँव बर्फ़ीली चट्टानों में दब गया है लेकिन प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है.
पुलिस का कहना है कि राहत दल इस गाँव की ओर जा रहे हैं लेकिन महत्वपूर्ण है कि हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल नहीं किया गया है.
समाचार हैं कि इसके साथ के दो गाँवों पर भी बर्फ़िली चट्टानें गिरी हैं और वहाँ 14 लोगों इनके नीचे दब कर मारे गए हैं.
बताया जा रहा है कि पिछले कई दशकों में उस क्षेत्र में इतनी बर्फ़ नहीं गिरी है.
भारत प्रशासित कश्मीर का ज़मीनी और हवाई संपर्क लगातार पाँचवें दिन देश के दूसरे हिस्सों से कटा हुआ है.
कई लोग अभी भी लापता है. मारे जाने वालों में से ज़्यादातर की मौत इसलिए हुई कि कई गाँव बर्फ़ से घिर गए और कई जगह हिमस्खलन हुआ.
विल्टेनगर गाँव के पास एक अन्य गाँव से एक नागरिक ने बीबीसी को बताया कि विल्टेनगर में कई लोगों के शव बरामद किए हैं और 90 लोगों को बचाया गया है.
इस नागरिक ने बताया कि गाँव में लगभग 150 मक़ान थे जिसमें तीन को छोड़ बाक़ी सारे बर्फ़ में दब गए हैं.
बर्फ़बारी रुकी
वैसे श्रीनगर में बर्फ़बारी रूक गई है और सोमवार को शहर में धूप भी निकली जिसके बाद सड़कों पर भीड़ लग गई.
लेकिन आम लोग प्रशासन के काम-काज से असंतुष्ट हैं और उन्होंने आरोप लगाए हैं कि प्रशासन सड़कों से बर्फ़ हटाने में नाकाम रहा.
शहरों में बिजली नहीं है और पानी की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है. अधिकारियों को चिंता है कि यदि बिजली की आपूर्ति शुरु नहीं हुई तो पीने का पानी लोगों तक पहुँचाना मुश्किल हो जाएगा.
भारतीय थल सेना के प्रवक्ता का कहना कि सेना के विमान सब्ज़ियाँ, दूध और अन्य ज़रूरी चीज़ें कश्मीर पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं.
सेना ने पहले ही क़रीब 65 हज़ार लीटर मिट्टी का तेल घाटी में पहुँचाया है और सेना सहायता कार्यों में भी मदद कर रही है.
सेना ने 45 विदेशी पर्यटकों को भी बचाया है जो ट्रैक्किंग करने कि लिए राज्य में थे.
राजमार्ग बंद
मगर कश्मीर घाटी को शेष भारत से जोड़नेवाली 300 किलोमीटर लंबी एकमात्र सड़क श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग सोमवार को लगातार पाँचवें दिन बंद रही.
अभी 4000 से भी अधिक लोग इस राजमार्ग पर बीच रास्ते में फँसे हुए हैं.
लगभग 300 लोग जवाहर सुरंग में फँसे हैं जिनमें आम लोग भी हैं और अर्धसैनिक बल के जवान भी. सुरंग के पास 13 फ़ीट की ऊँचाई तक बर्फ की पट्टी बन गई है.
जवाहर सुरंग में फँसे एक पत्रकार ने बीबीसी को बताया कि वहाँ लोगों के पास खाने-पीने के सामानों की कमी हो रही है.
उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों ने बताया है कि अभी वहाँ और बर्फ़बारी हो सकती है जिसके कारण अगले कुछ दिनों भी रास्ते के खुलने की सँभावना कम ही है.
पिछले गुरूवार से श्रीनगर से विमान सेवाएँ भी स्थगित हैं.