बुधवार, 16 फ़रवरी, 2005 को 06:56 GMT तक के समाचार
सौतिक बिस्वास
हर ओर तबाही मचाने वाली सूनामी लहरों का एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है.
सूनामी लहरों ने एक तरह से दक्षिण भारत के प्राचीन बंदरगाह शहर के भग्नावशेष खोजने में मदद की है.
पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि 26 दिसंबर को आई सूनामी लहरों ने दक्षिण भारत के प्रसिद्ध महाबलीपुरम मंदिर से संबंधित अवशेषों को सामने ला दिया.
उनका मानना है कि ये अवशेष 1200 साल पुराने समुद्र के किनारे बसे शहर और वहाँ स्थित मंदिर के हो सकते हैं.
इन तीन अवशेषों में ग्रेनाइट का एक शेर है और ये तीनों समुद्री ज्वार के उतर जाने के बाद रेत में दबे पाए गए.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के एक अधिकारी टी सत्यमूर्ति का कहना है, "ये छोटे तटीय शहर का हिस्सा हो सकते हैं जो पानी के नीचे दब गया था. हम लोग इसकी जाँच कर रहे हैं.''
पुरातत्वविदों का कहना है कि ये प्रस्तर शिलाखंड 7वीं शताब्दी तक पुराने हो सकते हैं. ये लगभग 6 फुट लंबे हैं और इनका वास्तु महाबलीपुरम के मंदिरों से मिलता जुलता है.
महाबलीपुरम विश्व धरोहर स्थल है और यह शुरुआती द्रविड़ सभ्यता का नमूना है. इसमें भी ग्रेनाइट का इस्तेमाल हुआ है.
सूनामी लहरों ने कलपक्कम में नौ इंच लंबी काँसे की एक बुद्ध प्रतिमा को भी सामने ला दिया है.
टी सत्यमूर्ति बताते हैं, "यह मूर्ति कुछ अन्य चीज़ों के साथ ही पड़ी थी. ऐसा लगता है कि यह बर्मा या थाईलैंड से बहकर यहाँ पहुँची है."
इस बुद्ध मूर्ति को शायद जल्दी ही संग्रहालय में स्थान मिल जाएगा. सत्यमूर्ति कहते हैं कि अगर किसी ने इस के लिए दावा नहीं किया तो इसकी पूरी हिफ़ाज़त की जाएगी.