बुधवार, 16 फ़रवरी, 2005 को 13:23 GMT तक के समाचार
झारखंड से नलिन कुमार
बीबीसी हिंदी संवाददाता
झारखंड के पहले विधानसभा चुनाव की रेलमपेल में संथाल परगना के पहले सांसद की पत्नी की मुसीबतों की परवाह किसी को नहीं है.
मुंगली डडो दुमका ज़िले के सरायदाहा गाँव में ख़ुशहाली की उम्मीदें पाले बदहाली का जीवन जी रही है.
लाल बाबा के नाम से प्रसिद्ध उनके पति ने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ बग़ावत का झंडा बुलंद किया था, और आज़ादी के बाद वह संथाल परगना के पहले सांसद निर्वाचित हुए थे.
अपनी व्यथा का बयान करते हुए स्वर्गीय पति को याद कर मुंगली की आँखें नम हो जाती है. उन्होंने कहा, "लाल बाबा जेल गए, इतना काम किया. हमें सरकार ने एक ठो घर नहीं दिया है."
लाल बाबा 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारियों में से थे. लाठी पहाड़ के जंगलों से उन्होंने गुरिल्ला लड़ाई का संचालन किया था. अंग्रेज़ों ने उनकी गिरफ़्तारी पर इनाम भी घोषित कर रखा था.
बेटा बनेंगे नेता
आज़ादी से पहले जहाँ लाल बाबा ने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ गुरिल्ला युद्ध छेड़ा था, वहीं स्वतंत्रता के बाद उन्होंने अशिक्षा के ख़िलाफ़ बिगुल फूंका.
आज भी संथाल परगना के बेहतरीन स्कूल-कॉलेज लाल बाबा के प्रयासों की मिसाल बने हुए हैं.
आज लाल बाबा की बेटी पार्वती हेम्ब्रम राँची और देवघर के सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों से नर्सिंग की ट्रेनिंग लेने के बाद भी बेरोज़गार है.
पार्वती की माँ मुंगली कहती हैं, "परिवार का गुज़ारा सरकार से मिले चार हज़ार रुपये की पेंशन में मुश्किल से हो पाता है."
नेताओं के आश्वासनों से ऊबी मुंगली कहती हैं, "नेताओं से हर बार मुझे ‘होगा-होगा’ सुनने को मिलता है, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ."
अब संथाल परगना के पहले सांसद की पत्नी को एक ही उम्मीद है कि डाक विभाग से रिटायर हुआ बेटा भादो हेम्ब्रम एमएलए बनकर कुछ कर सकेगा.
बहरहाल भादो ने कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय के रूप में अपना भाग्य आज़माने का फ़ैसला किया है.