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रविवार, 13 फ़रवरी, 2005 को 16:18 GMT तक के समाचार

मतदाता सूची में भी लगेगी तस्वीर

भारतीय चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि वह मतदाताओं के फोटो मतदाता सूची में लगाने जा रहा है ताकि फर्ज़ी मतदान को पूरी तरह से रोका जा सके. इसकी शुरूआत अगले वर्ष अप्रैल महीने में केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव से होगी.

बीबीसी के विशेष कार्यक्रम 'आपकी बात बीबीसी के साथ' में उप चुनाव आयुक्त और आयोग के प्रवक्ता एएन झा ने कहा, "हमने केरल में विधानसभा की सभी 140 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए मतदाता के फोटो को उसके नाम के साथ लगाने का काम पूरा कर लिया है."

एएन झा ने कहा कि केरल में यह प्रयोग के तौर पर किया जा रहा है और बाद में इसे धीरे-धीरे पूरे देश में लागू किया जाएगा.

उन्होंने कहा, "भारत की चुनावी प्रक्रिया की दुनिया भर में प्रशंसा होती है, इसमें और सुधार लाने के लिए दो बातों पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है, एक तो मतदाता सूची और दूसरे मतदाता परिचय पत्र, इन दोनों को दुरूस्त करने की ज़रूरत है क्योंकि चुनाव संबंधी ज़्यादातर समस्याएँ इन्हीं दोनों की वजह से पैदा होती हैं. चुनाव आयोग इन्हें ठीक करने में लगा है."

जब उनसे पूछा गया कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने में आयोग क्यों नाकाम रहा है तो उन्होंने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त ने केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है जिस पर विचार चल रहा है, इस प्रस्ताव में कहा गया है कि जिन लोगों के खिलाफ़ गंभीर आपराधिक आरोप हैं और अदालत ने जिनका संज्ञान ले लिया है ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने से रोका जाए."

मौजूदा चुनाव

चुनाव आयोग के प्रवक्ता ने बिहार और झारखंड में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, "बिहार और झारखंड में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना एक चुनौती है. दोनों राज्यों में नक्सली हिंसा की वजह से क़ानून व्यवस्था की समस्याएँ हैं. कई जगहों से हमें आपराधिक तत्वों की मौजूदगी के समाचार भी लगातार मिल रहे हैं इसलिए एक बड़ी चुनौती बन गया है."

केंद्रीय बलों की तैनाती के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता का कहना था, "पिछले वर्ष के लोकसभा चुनाव के बाद आयोग ने केंद्र सरकार से कहा है कि मतदान पर्यवेक्षकों के पास केंद्रीय बलों की तैनाती के आदेश देने का अधिकार होना चाहिए."

जब एएन झा से पूछा गया कि हरियाणा में सरकारी अधिकारी शिकायत कर रहे हैं कि राज्य सरकार उन पर दबाव डाल रही है, उनसे पूछा जा रहा है कि वे किसके अधीन काम करते हैं, सरकार के या आयोग के. इसके जवाब में उन्होंने कहा, "देखिए, राज्य सरकारें अपना काम करती हैं और चुनाव आयोग उनके काम में दख़लंदाज़ी नहीं करता. जहाँ तक आचार संहिता का सवाल है आयोग की नज़र रहती है. लेकिन यह बहुत स्पष्ट है कि जब तक वोटों की गिनती नहीं हो जाती आदर्श आचार संहिता लागू रहती है."

तीन विधानसभाओं के लिए हो रहे इस चुनाव की प्रक्रिया में इतना अधिक समय क्यों लग रहा है, इसके जवाब में प्रवक्ता ने कहा कि "हरियाणा में मतदान और परिणामों की घोषणा के बीच जिस अंतर की बात की जा रही है वह इसलिए है क्योंकि हम नहीं चाहते कि परिणामों का असर दूसरे राज्यों के मतदान पर पड़े."

मतदान के दूसरे चरण में बिहार की 243 में से 83 सीटों पर और झारखंड की 81 में से 29 सीटों पर मतदान 15 फ़रवरी को होगा.