रविवार, 06 फ़रवरी, 2005 को 12:26 GMT तक के समाचार
नेपाल के मानवाधिकार गुटों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता की गुहार लगाई है कि वे आपातकाल के कड़े प्रावधानों को ख़त्म करने का दबाव डालें.
उनका आरोप है कि नेपाल के राजा ज्ञानेंद्र सत्ता संभालने के आतंक और अफरातफरी फैला रहे हैं.
राजा ज्ञानेंद्र ने पिछले मंगलवार को यह कहकर सरकार को बर्खास्त कर दिया था कि वह माओवादी शक्तियों से निपटने में नाकाम रही है.
कोई 25 मानवाधिकार संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान और अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश सहित कई राष्ट्राध्यक्षों को संदेश भेजे हैं.
इन संगठनों ने अपने संदेश में कहा है कि नेपाली जनता इस समय राजा ज्ञानेंद्र के नेतृत्व वाले सैनिक प्रशासन के अधीन हैं जो पूर्ण रुप से असंवैधानिक है.
उनका कहना है कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर नज़र रखी जा रही है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है.
इन संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा है कि वे नेपाल को मिलने वाली सैन्य सहायता रोक दें और सरकार से कहें कि वह ज़ाहिर करें कि गिरफ़्तार किए गए लोग कहाँ रखे गए हैं.
उल्लेखनीय है कि पाँच पूर्व प्रधानमंत्री सहित कई और राजनीतिक नेताओं को उनके घरों में नज़रबंद किया गया है.
पत्रकारों पर कार्रवाई
नेपाल में सरकार को बर्खास्त करने के पाँच दिनों बाद कई पत्रकारों पर कार्रवाई की गई है.
सैन्य प्रशासन ने इस बात की पुष्टि की है कि नेपाली पत्रकार परिषद के महासचिव विष्णु निष्ठुरी को गिरफ़्तार किया गया है.
परिषद का कहना है कि उनके अध्यक्ष को भी गिरफ़्तार कर लिया गया है लेकिन प्रशासन का कहना है कि उनकी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है.
उधर कई पत्रकारों को भूमिगत होना पड़ा है.