शुक्रवार, 04 फ़रवरी, 2005 को 08:24 GMT तक के समाचार
नेपाल की सेना ने कहा है कि वह माओवादी विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अपना अभियान तेज़ करने जा रही है.
सेनाध्यक्ष प्यार जंग थापा ने कहा कि अभियान में तेज़ी का मकसद विद्रोहियों को बातचीत करने पर मजबूर करना है.
इससे पहले नेपाल में नरेश ज्ञानेंद्र के देउबा सरकार को बर्ख़ास्त करने, आपातकाल लागू करने और सत्ता अपने हाथ में लेने के बाद माओवादियों ने नेपाल नरेश से बातचीत से इनकार कर दिया था.
उधर नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के प्रवक्ता ने कहा है कि देश में राजनीतिक दल शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे और नेपाल नरेश का कार्रवाई का विरोध करेंगे.
नेपाल में नरेश ज्ञानेंद्र ने प्रेस पर छह महीने के लिए सेंसरशिप लगा दी है.
देउबा के प्रवक्ता मिनेंद्र रिजाल का कहना था कि नेपाल की समस्या का हल सत्ता का केंद्रीकरण नहीं बल्कि और लोकतंत्र है.
जब नरेश ज्ञानेंद्र ने सत्ता अपने हाथ में ली तो शेर बहादुर देउबा को उनके घर पर नज़रबंद कर दिया गया.
उनकी सरकार को बर्ख़ास्त करने का कारण ये दिया गया कि वे नौ साल से चले आ रहे विद्रोह को ख़त्म करने में नाकाम रहे हैं.
उधर नेपाल के सैनिक बलों ने भी आपातकाल लागू किए जाने को सही ठहराया है और कहा है कि जब सरकार 'आतंकवाद' का सामना कर रही हो तो ये जायज़ है.
प्रतिबंध
नेपाल के एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित एक नोटिस में कहा गया कि गत मंगलवार को घोषित आपातकाल की आलोचना करने वाली ख़बरें छह महीने के लिए प्रतिबंधित कर दी गई हैं.
टेलीफ़ोन लाइन और इंटरनेट संपर्क भी बंद रहेंगे ताकि माओवादी विद्रोहियों की हड़ताल का आहवान लोगों तक नहीं पहुँच सके.
नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र की नई सरकार ने माओवादी विद्रोहियों से कहा है कि वे बातचीत में शामिल हों या फिर अन्य सख़्त कार्रवाई भुगतने के लिए तैयार रहें.
माओवादी विद्रोहियों के प्रवक्ता ने बुधवार को नेपाल नरेश के साथ किसी भी बातचीत की संभावना से इनकार कर दिया था.
अभी यह साफ़ नहीं है कि अगर माओवादी विद्रोही बातचीत में शामिल नहीं होते हैं तो नरेश क्या कार्रवाई करेंगे.
देश में आपातकाल लगाने के नरेश के क़दम की संयुक्त राष्ट्र, अमरीका, ब्रिटेन, भारत और अनेक मानवाधिकार संगठनों ने आलोचना की है.