शनिवार, 29 जनवरी, 2005 को 20:46 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान के मानवाधिकार संगठन का कहना है कि देश में शांति और स्थिरता के लिए ज़रूरी है कि युद्ध अपराध के दोषी लोगों को सज़ा मिले.
मानवाधिकार संगठन का कहना है, "सज़ा नहीं मिलने के कारण ऐसे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और वे बेख़ौफ़ होकर लोगों को प्रताड़ित करना जारी रखेंगे."
मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान के 69 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे 'मानवता के ख़िलाफ़ किए गए अपराधों के शिकार' रहे हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि पुलिस और न्याय व्यवस्था में सुधार लाकर ही मानवाधिकारों की रक्षा की जा सकती है.
मानवाधिकार संगठन ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए लगभग छह हज़ार लोगों से बात की जिनमें से 90 प्रतिशत से अधिक लोगों ने मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को पद से हटा दिया जाए जबकि 40 प्रतिशत से अधिक लोगों की माँग थी कि दोषियों पर मुकदमा चलाया जाए.
संयुक्त राष्ट्र
मानवाधिकार मामलों की संयुक्त राष्ट्र की उच्चायुक्त लुईस आर्बर ने कहा, "मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले लोगों को अपनी ताक़त का ग़लत इस्तेमाल करने से रोकने के लिए ज़रूरी है कि उनके पिछले और मौजूदा कृत्यों के लिए उन्हें दंडित किया जाए."
इस रिपोर्ट में एक आम अफ़ग़ान नागरिक को यह कहते हुए उद्धृत किया गया था कि "इस देश में सत्ता तक पहुँचने वाले हर व्यक्ति ने ज़्यादतियाँ की हैं. हत्या, लूट, बमबारी, बलात्कार सब कुछ हुआ है."
अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव के बाद बनी सरकार में कई कबायली सरदार प्रमुख पदों पर हैं, इन सरदारों की अपनी निजी सेना है और उन्हें मनमानी करने से रोकने की कोई कारगर व्यवस्था अभी तक नहीं है.
राष्ट्रपति करज़ई ने कहा, "पुलिस और न्यायिक प्रणाली में सुधार के साथ अफ़ग़ानिस्तान धीरे-धीरे ऐसा देश बनने की दिशा में बढ़ रहा है जो सामाजिक न्याय और मानवाधिकार के सिद्धांतों पर टिका होगा."
लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के ज़्यादातर लोगों का मानना है कि हामिद करज़ई की सरकार काबुल तक ही सीमित है, काबुल से बाहर उनका नियंत्रण बहुत कम है.