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रविवार, 30 जनवरी, 2005 को 11:18 GMT तक के समाचार

हरियाणा से लौटकर विनोद वर्मा
बीबीसी संवाददाता

सरकार के ख़िलाफ़ एक प्रदर्शन ऐसा भी

हरियाणा के नरवाणा क़स्बे में सैकड़ों लोग कच्छा बनियान पहने हाथ में कटोरा लिए सड़क पर उतरकर भीख मांगने लगे.

ये लोग हरियाणा सरकार के साढ़े बाइस हज़ार पूर्व कर्मचारियों के प्रतिनिधि थे जिन्हें तीन साल पहले हरियाणा सरकार ने नौकरी से हटा दिया था.

दरअसल हरियाणा सरकार ने एक दर्जन से अधिक निगमों और प्राधिकरणों को बंद करने और चार हज़ार रिक्त पदों को समाप्त करने का निर्णय लिया था.

सरकार का तर्क था कि खर्च घटाने के लिए यह क़दम उठाना पड़ा लेकिन इस एक निर्णय ने एकाएक साढ़े बाइस हज़ार ऐसे लोगों को एकाएक बेरोज़गार कर दिया जो कई-कई सालों से सरकारी नौकरी पर थे.
 हमको सरकार ने कहीं का नहीं छोड़ा और हमारी हालत ऐसी हो गई है कि कच्छा बनियान पहनकर भीख मांगने के अलावा कुछ नहीं बचा है
 
हरमिंदर सिंह, पूर्व कर्मचारी

विभिन्न कर्मचारी संगठनों के संयुक्त संगठन के संयोजक बरनवाल का कहना है कि इन तीन सालों में डेढ़ सौ से अधिक कर्मचारियों ने आत्महत्या कर ली और इतने ही लोग अपना मानसिक संतुलन खो बैठे.

तभी से उनका आंदोलन चल रहा है और लोग मांग कर रहे हैं कि उनकी नौकरी बहाल की जाए.

आरोप

बरनवाल का आरोप है कि सरकार ने एक ओर तो विभागों को बंद कर दिया लेकिन इन विभागों का कामकाज बंद नहीं हुआ है.

वे कहते हैं, “चौटाला सरकार अब चुनाव में पाँच लाख नए रोज़गार का वादा कर रही है लेकिन वो ये नहीं बता रही है कि साढ़े बाइस हज़ार को हटाकर वे इतने लोगों को किस तरह नौकरी दे सकेंगे.”

उनका कहना है कि पुलिस विभाग से 16 सौ लोगों को हटा दिया गया और चौटाला साहब दावा कर रहे हैं कि पुलिस विभाग में 15 हज़ार लोगों को नौकरी दी गई है, तो ये कहाँ का इंसाफ़ है.

पच्चीस साल तक नौकरी करने के बाद अचानक एक दिन बेरोज़गार हो गए हरमिंदर सिंह कहते हैं, “हमको सरकार ने कहीं का नहीं छोड़ा और हमारी हालत ऐसी हो गई है कि कच्छा बनियान पहनकर भीख मांगने के अलावा कुछ नहीं बचा है.”

कर्मचारियों के संगठन क़समें खा रहे हैं कि वे इन चुनावों में चौटाला सरकार को वोट नहीं देंगे.

हालांकि बरनवाल ये नहीं मानते कि वे ऐसी अपील करके वे कांग्रेस को जितवाना चाहते हैं. हालांकि वे स्पष्ट करते हैं कि भाजपा पर भी उन्हें भरोसा नहीं क्योंकि आज वे जो भी कह रहे हों पहले जब वे चौटाला के साथ थे तब उन्होंने कर्मचारियों को हटाए जाने का कोई विरोध नहीं किया था.

साढ़े बाइस हज़ार कर्मचारी और उनके परिवार वाले इन चुनावों में किसे वोट देंगे ये तो नहीं पता लेकिन वे किसे वोट नहीं देंगे यह पारदर्शी सा सच है.