गुरुवार, 20 जनवरी, 2005 को 13:53 GMT तक के समाचार
विश्व बैंक ने एक बयान जारी करके भारत और पाकिस्तान के बीच बगलिहार बाँध विवाद के मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट की है.
पाकिस्तान ने विश्व बैंक से माँग की थी कि वह किसी विशेषज्ञ से मामले की निष्पक्ष जाँच कराए.
बैंक ने कहा है कि वह दोनों देशों के बीच पानी के बँटवारे को लेकर हुई किसी संधि की गारंटी नहीं लेता. हालाँकि उसने कहा है कि पाकिस्तान के आग्रह पर विचार किया जा रहा है.
1960 के दशक में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई जल संधि में विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी.
विश्व बैंक ने अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा है कि विवाद बढ़ने पर वह मामले की जाँच के लिए किसी निष्पक्ष विशेषज्ञ को नियुक्त कर सकता है.
यदि विशेषज्ञ भी दोनों पक्षों को मान्य कोई हल सुझा नहीं सका तो बैंक किसी न्यायाधिकरण या पंचाट की नियुक्ति करने पर विचार करेगा.
भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते तहत भारत से होकर पाकिस्तान जाने वाली छह नदियों के पानी के बारे समझौता हुआ था. समझौता कराने में विश्व बैंक की बड़ी भूमिका थी.
समझौते से जुड़ी छह नदियों में चनाब भी शामिल है. इसी नदी पर बगलिहार बाँध बनाया जा रहा है.
पुराना विवाद
हाल में आपसी विश्वास बढ़ाने वाले प्रस्तावों में भी बगलिहार सबसे विवादास्पद रहा था क्योंकि पाकिस्तान ने खुलकर इस मामले में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की मांग की थी.
दोनों देशों के बीच पिछले महीने में दिल्ली में बगलिहार पर वार्ता हुई थी लेकिन सहमति नहीं बन सकी.
पाकिस्तानी पक्ष का कहना है कि भारत ने चनाब नदी पर 450 मेगावाट क्षमता की एक परियोजना को रोक लेने की पाकिस्तान की मांग नहीं मानी है.
समस्या की जड़ पानी है क्योंकि भारत की इन नदियों से पाकिस्तान को 8000 क्यूसेक से अधिक पानी मिलता है.
इन नदियों पर भारत में बाँधों के निर्माण पर पाकिस्तान को हमेशा आपत्ति रहती है क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे भारत नदियों के पानी पर अपना नियंत्रण कायम कर लेगा.