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सोमवार, 17 जनवरी, 2005 को 19:47 GMT तक के समाचार

राजीव खन्ना
बीबीसी गुजरात संवाददाता

गोधरा काँड मुक़दमे का सफ़र

गोधरा रेल कांड की जाँच कर रही जस्टिस उमेश चंद्र बैनर्जी समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में कहा है कि साबरमती एक्सप्रेस में आग बाहर से नहीं लगाई गई थी.

इस समिति ने कहा है कि आग डब्बे के भीतर ही लगी होगी और यह साक्ष्यों के आधार पर दुर्घटना ही दिखाई देती है. समिति की इस नई अंतरिम रिपोर्ट से इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है.

गोधरा काँड को लगभग तीन साल पूरे हो चुके हैं, इस दौरान इस मामले का अदालती सफ़र काफ़ी पेचीदा रहा है.

एक तरह से देखें तो न्यायापालिका की पटरी पर यह मामला अभी रुका हुआ ही है.

गोधरा रेल आगज़नी काँड मामले की सुनवाई पर फिलहाल उच्चतम न्यायालय की रोक लगी हुई है.

कुछ ग़ैरसरकारी और मानवाधिकार संगठनों ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करके माँग की थी इस मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई से कराई जाए और मुक़दमे की सुनवाई भी गुजरात से बाहर ही हो.

ग़ौरतलब है कि 27 फ़रवरी 2002 को हुए इस काँड में 59 लोग मारे गए थे जिनमें ज़्यादातर वे कारसेवक थे जो अयोध्या से लौट रहे थे.

इस मामले में 135 अभियुक्तों के नाम हैं जिनमें से 105 को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

इन सभी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ 'आतंकवाद निरोधक क़ानून' पोटा लगाया गया है और इस मामले की सुनवाई भी पोटा अदालत ही कर रही है.

इस दौरान दो अभियुक्तों की मौत भी हो चुकी है जिनमें से एक अभियुक्त की पुलिस हिरासत में और एक की मौत बीमारी से हुई है.

बाक़ी में से 14 अभियुक्तों के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नहीं होने के आधार पर उन्हें रिहा कर दिया गया है. इनके अलावा 14 अभियुक्तों को ज़मानत भी मिल चुकी है.

इस मामले में अभी दस आरोप-पत्र दाख़िल किए गए हैं.