सोमवार, 17 जनवरी, 2005 को 12:50 GMT तक के समाचार
गोधरा कांड पर यूसी बैनर्जी समिति की रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि उनकी आशंका सही साबित हुई है और यह दोषियों को बचाने की कोशिश है.
जबकि केंद्र में सत्तारुढ़ गठबंधन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस का कहना है कि आख़िर वह रिपोर्ट सामने आ गई है जो ढाई साल तक जनता से छिपाकर रखी गई.
उल्लेखनीय है कि यूपीए सरकार बनने के बाद रेलमंत्री लालूप्रसाद यादव ने गोधरा कांड की जाँच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था जिसकी अंतरिम रिपोर्ट सोमवार को पेश की गई.
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के डब्बे में लगी आग महज़ एक दुर्घटना थी.
भारतीय जनता पार्टी के महासचिव अरुण जेटली ने समिति के गठन और रिपोर्ट के समय पर आपत्ति जताई.
अरुण जेटली ने कहा कि जो मामला रेलवे के अधिकार क्षेत्र में नहीं है उसकी जाँच रेलवे किस तरह कर सकती है. उनका कहना था कि यह आपराधिक मामला है और इसकी जाँच पुलिस ही कर सकती है रेलवे की कोई समिति नहीं.
उनका कहना था कि इस मामले की जाँच के बाद आपराधिक मामला चल रहा है, दो जजों की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया गया है.
अरुण जेटली ने कहा, "हमें आशंका थी कि जो लोग गोधरा कांड के लिए ज़िम्मेदार हैं उनकी मदद के लिए ये जाँच बिठाई गई है. कोशिश है कि उन दोषियों को दोषमुक्त कर दिया जाए और सुनवाई में माहौल उनके पक्ष में बने."
उनका आरोप था, "रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने बिहार चुनाव को ध्यान में रखते हुए वोट बैंक की राजनीति के तहत यह सब किया है."
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर कांग्रेस ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जो कुछ गोधरा में हुआ उसे जनता को जानने का हक़ था.
कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि जो कुछ गोधरा में हुआ वह दुखदायी था और उसकी भर्त्सना की गई लेकिन जो उसके बाद जो हिंसा हुई और रक्तपात हुआ वह शर्मनाक था.
उनका कहना था, "रिपोर्ट में जो कुछ कहा गया वो सब बातें उस समय से ही सरकार को पता थीं और उसे लोगों को नहीं बताया गया. इसके कारण ही दंगा भड़का."
उन्होंने कहा, "ये बातें ढाई साल तक क्यों छिपी रहीं और सामने क्यों नहीं लाई गईं ये बातें गुजरात की जनता को क्यों नहीं बताई गईं."
उनका कहना था कि भाजपा की जो प्रतिक्रिया आई है वह स्वाभाविक है क्योंकि उसे नरेंद्र मोदी का बचाव करना है.
उन्होंने भाजपा के इस आरोप को ग़लत बताया कि कांग्रेस इससे राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है.
उनका कहना था कि जाँच आयोग की प्रामाणिकता पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाना चाहिए.