शनिवार, 15 जनवरी, 2005 को 13:25 GMT तक के समाचार
बहुजन समाजवाद पार्टी नेता मायावती ने एक बार फिर बड़े धूमधाम से अपना जन्मदिन मनाया जिसमें काफी समय से बीमार चल रहे वरिष्ठ पार्टी नेता कांशी राम भी मौजूद थे.
मायावती का जन्मदिन हमेशा ख़बरों में रहता है. वैसे तो भारतीय राजनीतिज्ञों के जन्मदिन मनाने के तरीके ही ख़बरों में रहते हैं. चाहे अमर सिंह हों या अटल बिहारी वाजपेयी.
इस बार मायावती ने जन्मदिन से पहले ही अपने स्टाइल में चंदा उगाहने की घोषणा कर सबको चौंकाया.
पिछले वर्षों में भारी भरकम कीमती उपहार लेने के लिए प्रसिद्ध मायावती ने इस बार सीधे सीधे लोगों से या उनकी ज़बान में आम जनता से धन देने की अपील की.
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह मिलने वाला धन वो पार्टी के काम में लगाएंगी.
इस प्रक्रिया में कितना धन एकजुट हुआ इसका हिसाब मिलना तो मुश्किल हे लेकिन जिस शानो शौकत से जन्मदिन मना, उससे कहा जा सकता है कि अच्छा खासा धन जुटाया गया होगा.
खुशी का मौका
पिछले तीन वर्षों में सत्ता से बाहर रही मायावती को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है.
ताज कारीडोर से लेकर भ्रष्टाचार के कई मामलों से जूझ रही मायावती के ख़िलाफ कल ही सीबीआई ने ताज कारीडोर मामला वापस लेने की घोषणा कर दी.
यही नहीं पिछले दिनों मायावती और सोनिया गांधी के बीच मुलाक़ात की भी ख़बरें भी आई है जिनके बारे में कहा जाता है कि ये राजनीति के बदलते समीकरणों का संकेत हैं.
हालांकि मायावती ने इस बारे में पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया.
जन्मदिन का समारोह स्थल भी इस बार कोई पांच सितारा होटल न होकर मायावती का आवास ही था लेकिन केक बिल्कुल अंग्रेजी स्टाइल का जिस पर मोमबत्तियों की जगह अग्नि प्रज्जविलत थी.
पिछले बार की अपेक्षा समारोह की धूमधाम तो कम थी लेकिन मायावती के बयानों में कोई ख़ास अंतर नहीं था.
उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में मनुवादियो को कोसा लेकिन साथ ही यह भी जोड़ दिया कि अब स्वर्ण या ऊंची जाति के लोग बसपा का रुख कर रहे हैं.