शनिवार, 15 जनवरी, 2005 को 14:35 GMT तक के समाचार
फैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददताता, भोपाल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भोपाल में हिंदू धर्म से जुड़े कुछ ऐसे होर्डिंग लगाए हैं जिससे शहर में विवाद खड़ा हो गया है.
नगर के बुद्धिजीवी वर्ग ने इन होर्डिंगो पर आपत्ति की है और कहा है कि ऐसे इनसे धार्मिक तनाव पैदा हो रहा है.
पिछले चंद दिनों में भोपाल के व्यस्त चौराहों और सड़कों के किनारे लगाए गए इन होर्डिंगों और बैनरों में अल्पसंख्यकों की लगातार बढ़ रही आबादी की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए हिंदुओं से सीधा सवाल किया गया है.
होर्डिंग कहता है- "आपके नाती-पोते हिंदू रह सकेंगे क्या? जनगणना 2001 का विस्फोटक संकेत. "
ये होर्डिंग आरएसएस की भोपाल शाखा ने लगाए हैं.
आकड़ों का खेल
भारत में हर दस साल में जनगणना की जाती है.
सन् 2001 की जनगणना में सरकार ने लोगों से कुछ और सवाल किए और धर्म से जुड़े कुछ नए तथ्य जारी किए गए. मसलन प्रत्येक धार्मिक समुदाय के जन्म दर का प्रतिशत.
जनगणना के आकड़ो के अनुसार 1991 से 2001 के बीच मुस्लिम समुदाय में जन्म दर 36 प्रतिशत से घटकर 29 प्रतिशत हो गया है यानी इसमें सात प्रतिशत की कमी हुई.
लेकिन् यह दर अभी भी अन्य समुदायों के जन्म दर में आई कमी के मुकाबले अधिक है. इस बात को संघ ने अपने ही ढंग से पेश किया है.
संघ के मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ संचालक उत्तम चंद इसरानी इन बैनरों के बारे में कहते हैं, " जहां तक जनगणना का सवाल है, हम समझते हैं कि हिंदू धर्म को माननेवालों की संख्या घट रही है. कुछ लोगों की दरें बढ़ रही है. यह बात मै नहीं कह रहा. चेन्नई में सेंटर फॉर स्टडी का भी यही कहना है. इस पर पुस्तिका भी छपी है. "
आपत्तियाँ
लेकिन भोपाल के बुद्धिजीवियों, कवियों और लेखकों का एक समूह इसे संघ परिवार के व्यापक एजेंडे का हिस्सा मान रहा है.
राष्ट्रीय सेक्यूलर मंच के संयोजक लज्जा शंकर हारडेनिया कहते हैं, " जबसे लोकसभा के चुनाव हुए हैं. तबसे संघ और भाजपा में चिंतन हो रहा है. उन्हे लगता है कि चुनाव में हार हिंदुत्व को छोड़ने के कारण हुआ है. मैं इन होर्डिगों को हिंदुत्व की नीति की ओर वापसी की तरह देखता हूं."
हिंदी के मशहूर कवि भागवत रावत ने भी इन होर्डिंगो की आलोचना की है.
हालांकि संघ के लोग आलोचनाओं को निराधार बताते हैं.
लेकिन जानकार मानते हैं कि पिछले कुछ महीनों में बहुत कुछ ऐसा हुआ है जिससे माना जा सकता है कि संघ और भाजपा हिंदुत्व की ओर लौट रही है.
चाहे शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा हो या चुनावों के बाद भाजपा को चुनावों के बाद राममंदिर की याद आना हो. यह जताता है कि संघ और भाजपा पुरानी लीक पर वापसी की ओर है.